विकसित भारत 2047 और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सतत, सशक्त और भविष्य के लिए तैयार शहरी ढांचे के संकल्प के अनुरूप, नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) के उपाध्यक्ष श्री कुलजीत सिंह चहल ने पालिका केंद्र स्थित अपने कार्यालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की. बैठक का उद्देश्य आगामी मानसून सत्र में जलभराव की समस्याओं से निपटने के लिए एनडीएमसी की तैयारियों की समीक्षा करना था. इस बैठक में एनडीएमसी के सचिव श्री तारिक थॉमस और सिविल इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे.
बैठक के बाद श्री चहल ने जलभराव के लिए चिन्हित कई महत्वपूर्ण स्थलों का निरीक्षण किया, जिनमें पुराना किला रोड, दयाल सिंह कॉलेज और भारती नगर क्षेत्र शामिल हैं. निरीक्षण के दौरान, उन्होंने पुराना किला रोड के समीप जजेस बंगले के पीछे 5 लाख लीटर क्षमता वाले एक बड़े समप (पिट) के निर्माण का शिलान्यास भी किया.
श्री चहल ने जानकारी दी कि यह नया समप एनडीएमसी की व्यापक मानसून तैयारी और शहरी जल प्रबंधन रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस समप में वर्षा जल एकत्र कर उसे ड्रेनेज सिस्टम में प्रवाहित किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में जलभराव की समस्या में काफी कमी आएगी.
उन्होंने यह भी बताया कि एनडीएमसी अन्य संवेदनशील स्थलों पर छोटे समप का भी निर्माण कर रही है ताकि जलभराव की समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके.
श्री चहल ने कहा, “समप वर्षा जल के त्वरित संग्रहण और निकासी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे शहरी बाढ़ और बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है. यह परियोजना माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी के आपदा-रोधी और जलवायु-अनुकूल भारत के निर्माण के दृष्टिकोण के अनुरूप है.”
उन्होंने बताया कि एनडीएमसी का ड्रेनेज नेटवर्क चार मुख्य जोनों में विभाजित है:
– डॉ. सेन नर्सिंग होम ड्रेन जोन: पचकुइयां रोड, नेहरू नगर के कुछ हिस्से, आरके आश्रम मार्ग और कनॉट प्लेस क्षेत्र.
– ड्रेन नंबर 14 जोन: जजेस बंगले, तिलक मार्ग, पुराना किला रोड, सुप्रीम कोर्ट और इंडिया गेट क्षेत्र.
– कुशक ड्रेन जोन: चाणक्यपुरी और आसपास के इलाके.
– बरापुला ड्रेन जोन: एनडीएमसी क्षेत्र का लगभग 60% (करीब 1918 हेक्टेयर) क्षेत्र इस जोन में आता है, जो सुनेहरी नाला (बरापुला ड्रेन की शाखा) से जुड़ा है.
पुराना किला रोड क्षेत्र में लंबे समय से जलभराव एक बड़ी समस्या रही है. पहले भारी बारिश के दौरान बड़े पैमाने पर पंपों की तैनाती करनी पड़ती थी, लेकिन अब इस तकनीकी समाधान से स्थायी राहत मिलने की उम्मीद है.
श्री चहल ने दोहराया कि एनडीएमसी आधुनिक तकनीकों और जलवायु अनुकूल उपायों को तेजी से अपना रही है ताकि वर्षा जल निकासी को सुदृढ़ किया जा सके. उन्होंने कहा कि यह प्रयास भारत के शहरों को अधिक कुशल, पर्यावरण-अनुकूल और रहने योग्य बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा.
उन्होंने यह भी बताया कि एनडीएमसी वर्तमान में एक व्यापक ड्रेनेज सुधार कार्य योजना पर काम कर रही है, जिसमें निम्नलिखित पहलुओं को शामिल किया गया है:
– मौजूदा तूफानी जल निकासी प्रणाली का तकनीकी मूल्यांकन,
– चिन्हित नालों की सफाई और संरचनात्मक मरम्मत,
– जलभराव-प्रवण स्थलों पर पंपिंग क्षमता को मजबूत करना,
– मौजूदा वर्षा जल संचयन प्रणालियों की सफाई और पुनः सक्रिय करना,
– भूजल पुनर्भरण के लिए नए वर्षा जल संचयन गड्ढों का निर्माण.
-भारत एक्सप्रेस
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