CISF Women Battalion
भारत की सुरक्षा व्यवस्था में इतिहास रचते हुए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने अपनी पहली ऑल-विमेन कमांडो यूनिट का गठन किया है. यह कदम केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि वास्तविक बदलाव है- जो महिलाओं को सपोर्ट रोल से आगे बढ़ाकर सीधे ऑपरेशनल फ्रंटलाइन पर ला खड़ा करता है.
ASG से चुनी गई करीब 100 महिला जवान
एविएशन सिक्योरिटी ग्रुप्स (ASGs) से चुनी गई करीब 100 महिला जवान इस समय मध्यप्रदेश के बड़वानी ज़िले स्थित बारवाह रीजनल ट्रेनिंग सेंटर में आठ सप्ताह के कठिन प्रशिक्षण से गुजर रही हैं. 11 अगस्त 2025 से शुरू हुई इस ट्रेनिंग में हथियारों का लाइव-फायर अभ्यास, रैपलिंग, जंगल में जीवित रहने की तकनीकें और 48 घंटे की मानसिक व शारीरिक सहनशक्ति परीक्षा शामिल है, जो किसी भी एलीट टैक्टिकल यूनिट की ट्रेनिंग से कम नहीं.
पहली बैच 4 अक्टूबर तक और दूसरी बैच 29 नवंबर तक यह प्रशिक्षण पूरा करेगी. इसके बाद इन्हें क्विक रिएक्शन टीम (QRT) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) में शामिल किया जाएगा- शुरुआत में एयरपोर्ट्स पर और फिर अन्य संवेदनशील ठिकानों पर तैनाती होगी.
CISF में महिलाओं की 8% की हिस्सेदारी
वर्तमान में CISF में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 8% (12,491) है. गृहमंत्रालय के निर्देश के अनुसार 2026 तक इसे 10% तक ले जाने के लिए 2,400 नई महिला भर्ती की योजना है. यह पहल साबित करती है कि महिलाएँ अब सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि ऑपरेशनल कॉम्बैट रेडीनेस की धुरी बन रही हैं.
CISF के एक प्रवक्ता के शब्दों में—“यह टोकनिज़्म नहीं है, बल्कि विश्वास, तैयारी और ऑपरेशनल समानता का प्रतीक है.”
यह सिर्फ सुरक्षा रणनीति नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक क्रांति है—जहाँ महिला कमांडो की तैनाती न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को और मज़बूत बनाएगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी.
ऑल-विमेन कमांडो यूनिट भारत का यह संदेश है कि सुरक्षा अब लिंग नहीं, बल्कि साहस, क्षमता और नेतृत्व की पहचान से तय होगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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