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New Labour Code: क्या नया लेबर कोड उद्योगपतियों की आकांक्षाएं पूरी करता है, अब आपको भी करनी होगी 9-9-6 की शिफ्ट?

New Labour Code: देश में कुछ बड़े उद्योगपति सप्ताह में काम के घंटे को बढ़ाने को लेकर अक्सर बयान देते रहते हैं. इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति भी उनमें से एक हैं, जो 72 घंटे के कार्यसप्ताह (72 Hours Work Week) की वकालत कर रहे हैं.

New Labour Code: देश में कुछ बड़े उद्योगपति सप्ताह में काम के घंटे को बढ़ाने को लेकर अक्सर बयान देते रहते हैं. इंफोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति भी उनमें से एक हैं, जो 72 घंटे के कार्यसप्ताह (72 Hours Work Week) की वकालत कर रहे हैं. उनका कहना है कि भारत के युवाओं को देश को अपनी क्षमता तक पहुंचाने और एक विकसीत देश बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने की ज़रूरत है.

नारायण मूर्ति को तब से वर्क-लाइफ बैलेंस को नज़रअंदाज़ करने के लिए बहुत आलोचना का सामना करना पड़ा है. भारत अक्सर में शिफ्ट से ज्यादा काम करना आम बात है. 21 नवंबर को लागू हुए नए लेबर कोड, वर्कवीक को 48 घंटे तक लिमिट करते हैं.

अब 12 घंटे की हो सकती है शिफ्ट

नए लेबर कोड 29 मौजूदा सेंट्रल लेबर कानूनों की जगह लेते हैं, जिनका मकसद भारत के लेबर-लॉ फ्रेमवर्क को आसान, मॉडर्न और तार्किक बनाना है. हालांकि लेबर कोड 48 घंटे के वर्कवीक की लिमिट में कोई बदलाव नहीं करते हैं, लेकिन वे चाहे चार लंबे दिन हों, पांच मीडियम दिन हों या छह स्टैंडर्ड दिन के ऑप्शन के साथ साप्ताहिक शेड्यूल को तय करने के लिए ज्यादा लचीलापन देते हैं.

इसका मतलब है एक वर्कवीक 8 से 12 घंटे के बीच हो सकता है और ज्यादा से ज्यादा चार दिनों के लिए 12 घंटे का हो सकता है.

नए लेबर कोड्स के मुताबिक, तय घंटों से ज्यादा ओवरटाइम काम सहमति पर आधारित होगा और आम मजदूरी दर से कम से कम दोगुना पेमेंट करेगा. हालांकि लेबर कोड्स का मकसद कर्मचारी के लाभ को नियोक्ताओं के लचीलापन के साथ बैलेंस करना है, लेकिन इस बात की चिंता है कि क्या उनका सच में ऐसे देश में पालन किया जाएगा जहां मानदंड, खासकर असंगठित सेक्टर में, बहुत कम लागू होते हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक व्यक्ति ने कहा, “देखते हैं कि यह असल में जमीन पर लागू होता है या नहीं. जब नारायण मूर्ति और एसएन सुब्रह्मण्यन जैसे प्रभावशाली लोग अभी भी 9-9-6 कल्चर की तारीफ़ करते हैं, तो उम्मीद रखना मुश्किल है, भले ही चीन ने अब हफ़्ते में काम के घंटे 44 घंटे तय कर दिए हैं.”

हफ्ते में 6 दिन सुबह 9 से रात 9 बजे तक काम

लेबर कोड्स 21 नवंबर को लागू हुए और कुछ ही दिन पहले नारायण मूर्ति ने चीन के 9-9-6 मॉडल का समर्थन करके अपने 72 घंटे के वर्कवीक के सुझाव पर ज़ोर दिया. 9-9-6 मॉडल का मतलब एक ऐसा वर्क शेड्यूल है जो कभी चीनी टेक कंपनियों में आम था, जहां कर्मचारियों से हफ्ते में छह दिन सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक काम करने की उम्मीद की जाती थी.

चीन, जिसने सस्ते लेबर के दम पर एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और टेक इकोसिस्टम बनाया है, उसने बहुत पहले ही 9-9-6 मॉडल को छोड़कर 44 घंटे के वर्कवीक को लागू कर दिया है.

वर्क-लाइफ बैलेंस की परवाह नहीं सिर्फ कागज़ पर

हालांकि नए लेबर कोड ओवरटाइम के लिए दोगुनी सैलरी ज़रूरी करते हैं, लेकिन लोग इस बात को लेकर सशंकित हैं कि क्या यह सच में बदलेगा, क्योंकि इससे टेक कंपनियों पर बहुत ज्यादा खर्च आएगा. वे यह भी बताते हैं कि नए नियम ऐसी कंपनियों की हायर-एंड-फायर पॉलिसी (काम पर रखना और निकालना) को कैसे मज़बूत करते हैं.

X पर एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “भारत के नए लेबर कोड टेक एक्सपर्ट्स के लिए एक बड़ा झटका हैं. 300 तक एम्प्लॉई वाली कंपनियां अब सरकार की मंज़ूरी के बिना (पहले 100) हायर और फायर कर सकती हैं, जिसका मतलब है कि पहले से ही लेऑफ से भरे टेक मार्केट में जॉब सिक्योरिटी कम हो जाएगी.”

नए लेबर कोड 48 घंटे के वर्कवीक की लिमिट बनाए रखते हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि जब तक नारायण मूर्ति जैसे एंटरप्रेन्योर वर्क-लाइफ बैलेंस की परवाह नहीं करते, तब तक वे सिर्फ़ कागज़ पर ही रह सकते हैं.


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-भारत एक्सप्रेस



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