बहु-डोमेन युद्ध के इस युग में, जहां खतरे सीमाओं से तेज़ी से बदलते हैं, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना ने अपनी संयुक्तता और रणनीतिक दूरदर्शिता का प्रमाण दिया है. 7 मई 2025 को ‘पाहलगाम आतंकवादी हमला’ जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई, उसके बाद शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर एक सुनियोजित, त्रि-सेवा अभियान था. इसका उद्देश्य नियंत्रण रेखा के पार और पाकिस्तान के अंदर आतंकवादी ढांचों को ध्वस्त करना था. यह एक सटीक, पेशेवर और उद्देश्यपूर्ण जवाब था जिसमें न्यूनतम नागरिक क्षति सुनिश्चित की गई.
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में भारत की बहु-एजेंसी खुफिया प्रणाली, योजनाबद्ध कार्रवाई और समन्वित हवाई, जमीनी और समुद्री ऑपरेशन शामिल थे. नौ बड़े आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया. भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के अंदर रणनीतिक लक्ष्यों जैसे नूर खान और रहीम यार खान एयरबेस पर उच्च प्रभावी हमले किए. भारतीय थलसेना और वायुसेना की संयुक्त वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तान के ड्रोन और यूसीएवी हमलों को निष्क्रिय किया.

भारतीय नौसेना ने अपने ‘कैरियर बैटल ग्रुप’ के साथ पश्चिमी समुद्री सीमा पर पूर्ण प्रभुत्व स्थापित किया, जिससे पाकिस्तान की नौसेना गतिविधियों को रोक दिया गया. बीएसएफ ने जम्मू-कश्मीर के सांबा क्षेत्र में एक घुसपैठ को नाकाम करते हुए दो आतंकियों को मार गिराया और भारी मात्रा में हथियार बरामद किए.

यह सिर्फ़ एक सामरिक जीत नहीं थी, बल्कि एक रणनीतिक संदेश था—जब कूटनीति विफल हो, तो ठोस जवाब देना ज़रूरी होता है.
सैन्य सुधारों की दिशा में प्रमुख सरकारी प्रयास
- चीफ़ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ (CDS) का गठन: 24 दिसंबर 2019 को CDS की नियुक्ति की गई, जो सेना, नौसेना, वायुसेना और टेरिटोरियल आर्मी के समन्वय, संयुक्त प्रशिक्षण और रणनीतिक योजना का नेतृत्व करता है.
- थिएटर कमांड का एकीकरण (ITCs): थिएटर कमांड्स को भौगोलिक क्षेत्रों के आधार पर सेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त क्षमताओं को संगठित करने हेतु तैयार किया जा रहा है. यह रक्षा बलों की संयुक्त संचालन योग्यता को सशक्त करेगा.
- मिलिट्री अफेयर्स विभाग (DMA): 2020 में गठित यह विभाग संसाधनों का समुचित उपयोग और तीनों सेनाओं में संयुक्तता को बढ़ावा देता है.
- इंटर-सर्विस ऑर्गेनाइजेशन एक्ट 2023: इस अधिनियम ने त्रि-सेवा कमांडरों को सभी सेनाओं के कर्मियों पर अधिकार देकर एकीकृत निर्णय प्रक्रिया को तेज़ किया है.
- संयुक्त लॉजिस्टिक नोड्स (JLN): मुंबई, गुवाहाटी और पोर्ट ब्लेयर में स्थापित तीन नोड्स ने लॉजिस्टिक एकीकरण में मदद की है, जिससे संसाधनों की बचत हुई है.
- संयुक्त प्रशिक्षण, सेमिनार और अभ्यास: ‘फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स’, ‘डिफेंस सर्विसेज टेक्निकल स्टाफ कोर्स’, ‘परिवर्तन चिंतन सम्मेलन’ और विभिन्न सेमिनारों के ज़रिए संयुक्तता और तकनीकी तैयारी को बढ़ावा दिया गया.

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प्रमुख सैन्य अभ्यास
•प्रचंड प्रहार 2025: अरुणाचल प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आयोजित एक त्रि-सेवा अभ्यास जिसमें पूर्ण समन्वय के साथ ऑपरेशन किए गए.
•डेज़र्ट हंट 2025: जोधपुर में विशेष बलों (पैरा, मरीन कमांडो, गरुड़) का त्रि-सेवा अभ्यास जो तीव्र समन्वय और प्रतिक्रिया क्षमता पर केंद्रित था.

तकनीकी एकीकरण और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध
•डिफेंस कम्युनिकेशन नेटवर्क (DCN): एक सुरक्षित, आधुनिक संचार नेटवर्क जो तीनों सेनाओं को जोड़ता है.
•IAF का IACCS सिस्टम: भारतीय वायुसेना का एकीकृत नियंत्रण प्रणाली, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीव्र समन्वय और प्रतिक्रिया की रीढ़ की हड्डी का काम किया.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 2025 को ‘रक्षा सुधार वर्ष’ घोषित किया, जिसमें संयुक्तता और एकीकरण को बढ़ावा देने, थिएटर कमांड को स्थापित करने, और बहु-डोमेन युद्ध के लिए सैन्य बलों को तैयार करने पर ज़ोर दिया गया.
भारत की थल, जल और वायु सेनाएं अब केवल स्वतंत्र इकाइयां नहीं, बल्कि एक समन्वित शक्ति हैं। ऑपरेशन सिंदूर और इसके पश्चात् किए गए सुधारों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब राष्ट्र की सुरक्षा की बात आती है, भारत तैयार, संगठित और अडिग है. संयुक्तता ही भविष्य की कुंजी है—और भारत पहले ही इस दिशा में मज़बूती से कदम बढ़ा चुका है.
-भारत एक्सप्रेस
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