अजीत डोभाल का चीन दौरा फोटो- Ai भारत एक्सप्रेस
NSA Ajit Doval Beijing Visit Agenda: पूर्वी लद्दाख और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर जारी तनाव के बीच भारत और चीन के रिश्तों में एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ देखने को मिल रहा है. भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल बीजिंग पहुंच रहे हैं, जहां वे अपने चीनी समकक्ष और विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद के समाधान के लिए स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स (SR) स्तर की 25वें दौर की ऐतिहासिक बातचीत में शामिल होंगे. यह बैठक दोनों देशों के कूटनीतिक और सैन्य रिश्तों के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है.
ब्रिक्स समिट से पहले डोभाल का ‘मिशन बीजिंग’ (Ajit Doval meets Wang Yi)
यह उच्चस्तरीय वार्ता ऐसे समय में हो रही है, जब नई दिल्ली में होने वाले आगामी ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के भारत दौरे की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. हालांकि उनके दौरे पर अभी आधिकारिक मुहर लगना बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि डोभाल का यह दौरा दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने और शीर्ष स्तर पर बातचीत की जमीन तैयार करने के लिए सबसे बड़ा कदम है.
गलवान के बाद से जारी गतिरोध पर फोकस (Ajit Doval Beijing Visit Update)
जून 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद से ही दोनों देशों के बीच रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे. पूर्वी लद्दाख में दोनों पक्षों ने भारी संख्या में सैनिकों और आधुनिक सैन्य साजो-सामान की तैनाती कर रखी है. हालांकि कई स्तरों की सैन्य और राजनयिक बातचीत के बाद कुछ पेट्रोलिंग पॉइंट्स से सैनिकों की वापसी (Disengagement) हुई है, लेकिन पूर्ण रूप से शांति और पहले जैसी यथास्थिति बहाल होना अभी बाकी है. स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स स्तर की इस वार्ता का मकसद केवल मौजूदा सैन्य तनाव को कम करना ही नहीं, बल्कि सीमा विवाद का एक स्थायी राजनीतिक समाधान तलाशना भी है.
अरुणाचल पर भारत का कड़ा रुख
हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीनी गतिविधियों और 27 स्थानों के चीनी नामकरण की बेतुकी कोशिशों पर भारत पहले ही कड़ा ऐतराज जता चुका है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में दोहराया था कि सीमा पर शांति और स्थिरता ही दोनों देशों के बीच रिश्तों की सामान्य बहाली का एकमात्र आधार है.
क्या निकलेगा कोई फॉर्मूला? (Ajit Doval China Visit Plan)
डोभाल और वांग यी की इस आमने-सामने की बैठक में LAC पर सैनिकों की पूर्ण वापसी, बफर जोन की समीक्षा, पेट्रोलिंग अधिकार और बॉर्डर मैनेजमेंट से जुड़े तमाम संवेदनशील मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी. अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि भारत के ‘क्राइसिस मैनेजर’ माने जाने वाले अजीत डोभाल बीजिंग की इस टेबल टॉक से क्या कूटनीतिक नतीजा लेकर लौटते हैं.
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