Omar Abdullah On Iran Warship: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर हुए अमेरिकी हमले को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए केंद्र सरकार को आगाह किया है. उमर अब्दुल्ला का मानना है कि इस हमले के जरिए परोक्ष रूप से भारत को भी पश्चिम एशिया के इस भीषण संघर्ष में घसीटा जा रहा है. उनके इस दावे के पीछे ठोस कूटनीतिक और मानवीय आधार हैं.
हमारा मेहमान था ईरानी युद्धपोत- Omar Abdullah
उमर अब्दुल्ला के दावे का सबसे बड़ा आधार IRIS Dena का भारत से जुड़ाव है. यह ईरानी युद्धपोत भारत में आयोजित बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन (MILAN) 2026’ में हिस्सा लेने आया था. उमर अब्दुल्ला ने कहा कि-
‘ईरान का यह युद्धपोत हमारा मेहमान था, क्योंकि वे नौसैनिक अभ्यास के लिए भारत आए थे. उन पर तब हमला हुआ जब वे अभ्यास पूरा कर वापस लौट रहे थे. मेहमान पर वापसी के दौरान हमला होना बताता है कि भारत को भी अब इस जंग का हिस्सा बनाने की कोशिश हो रही है.’
कश्मीरी छात्रों के लिए गुहार (Omar Abdullah On Kashmiri Students in Iran)
मुख्यमंत्री की चिंता का दूसरा बड़ा कारण कश्मीर का मानवीय हित है. कश्मीर के हजारों छात्र (विशेषकर मेडिकल के छात्र) और नागरिक इस समय ईरान में हैं. कई छात्रों को डर है कि अगर वे युद्ध के चलते ईरान छोड़ते हैं, तो उनके कॉलेज उनका एक साल खराब कर सकते हैं. उमर अब्दुल्ला ने बताया कि छात्र और उनके परिवार बेहद चिंतित हैं. उन्होंने इस मुद्दे को केंद्र सरकार के साथ उठाया है ताकि राजनयिक स्तर पर बात कर छात्रों को बिना शैक्षणिक नुकसान के वापस लाया जा सके.
IRIS Dena पर कैसा था वह हमला?
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, श्रीलंका के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी ने Mk-48 टॉरपीडो से ईरानी फ्रिगेट पर हमला किया. इस हमले में 87 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है. यह दुनिया के सबसे खतरनाक टॉरपीडो में से एक माना जाता है. यह जहाज के किनारे से नहीं टकराता, बल्कि जहाज की ‘कील’ (Keel) यानी निचले हिस्से के ठीक नीचे ब्लास्ट होता है. इससे पैदा हुआ गैस का बुलबुला जहाज को ऊपर उठाता है और फिर उसका स्ट्रक्चरल फेलियर कर उसे बीच से दो टुकड़ों में तोड़ देता है.
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सांप्रदायिक सौहार्द की अपील (Omar Abdullah To Publice)
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और ईरानी युद्धपोत पर हमले के बाद कश्मीर घाटी में भावनाएं उफान पर हैं. इसे देखते हुए उमर अब्दुल्ला ने लोगों से शांति की अपील की है. मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग अपने दुख और जज्बातों को शांतिपूर्ण तरीके से जाहिर करें. उन्होंने धार्मिक नेताओं के साथ बैठक कर प्रदेश में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया. घाटी के कुछ हिस्सों में सुरक्षा के मद्देनजर लगाए गए प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने की बात भी कही गई है.
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