महाराष्ट्र की राजनीति में बयानों के तीर अब सीधे परिवारों और बच्चों की संख्या तक पहुँच गया हैं. पूर्व सांसद नवनीत राणा के एक बयान ने ऐसी चिंगारी सुलगाई कि AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी सभा में चुन-चुनकर जवाब दिया. अमरावती में आयोजित एक जनसभा के दौरान ओवैसी ने अपने अंदाज़ में जनसंख्या और जन्म दर के मुद्दे पर जमकर चुटकी ली और विरोधियों को आड़े हाथों लिया.
ओवैसी ने सभा में उस चर्चा का जिक्र किया जिसमें किसी ने दावा किया था कि एक मौलाना के 19 बच्चे हैं. इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “लोग कहते हैं कि एक मौलाना के 19 बच्चे थे. भाई, मेरे तो सिर्फ 6 बच्चे हैं. मैं तो उस मौलाना से व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहता हूँ. मैं उनका हाथ पकड़कर पूछना चाहता हूँ कि भाई, ये 19 बच्चे कैसे हुए? इसका आखिर राज क्या है?”
ओवैसी के इस मजाकिया लहजे पर सभा में खूब ठहाके लगे, लेकिन उनके इस कटाक्ष के पीछे एक तीखा राजनीतिक संदेश भी छिपा था.
मोहन भागवत और चंद्रबाबू नायडू के बयानों की याद दिलाई
ओवैसी यहीं नहीं रुके, उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण की वकालत करने वालों को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के पुराने बयानों की याद दिला दी. उन्होंने कहा, “खुद मोहन भागवत साहब कहते हैं कि समाज को बचाने के लिए हर परिवार में कम से कम 3 बच्चे होने चाहिए, वरना समाज खत्म हो जाएगा. वो तो खुद जनसंख्या संतुलन की बात कर रहे हैं.”
इसके साथ ही उन्होंने आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू के उस बयान को भी ढाल बनाया जिसमें उन्होंने दक्षिण भारत में कम होती जन्म दर पर चिंता जताई थी. ओवैसी ने कहा, “नायडू कह रहे हैं कि जन्म दर गिरकर 1.5 रह गई है, इसे बढ़ाकर 2.1 पर लाना होगा. उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो भारत भी जापान और कोरिया की तरह बूढ़ा देश बन जाएगा. अब बताइए, सरकार के लोग ही ज्यादा बच्चे पैदा करने की वकालत कर रहे हैं.”
“हिम्मत है तो 20 बच्चे पैदा करो, कोई मना नहीं कर रहा”
नवनीत राणा के ‘4 बच्चों’ वाले बयान पर सीधा निशाना साधते हुए ओवैसी ने बड़ी बेबाकी से कहा कि किसी को बच्चों की संख्या पर दूसरों को ज्ञान देने की जरूरत नहीं है. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, “फॉर्मूला बहुत सीधा है—अगर किसी मौलाना के पास 19 हैं और आपके पास 4 हैं, तो आप रुक क्यों रहे हैं? अगर आपमें हिम्मत है तो 20 बच्चे पैदा कर लो, आपको रोक कौन रहा है?”
क्या है विवाद की जड़?
दरअसल, नवनीत राणा ने एक बयान में आबादी के बढ़ते संतुलन और विशेष समुदाय को लेकर कुछ टिप्पणी की थी, जिसके बाद से ही महाराष्ट्र की सियासत गरमाई हुई है. ओवैसी ने इस मुद्दे को जन्म दर और अर्थशास्त्र से जोड़कर पेश किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के करीब आते ही इस तरह के ध्रुवीकरण वाले बयानों में और तेजी आएगी.
फिलहाल, ओवैसी के इस पलटवार ने इस बहस को एक नई दिशा दे दी है. अब देखना यह है कि नवनीत राणा या भाजपा की ओर से इस ’20 बच्चों’ वाली चुनौती पर क्या जवाब आता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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