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Operation Sindoor में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ IPS ऑफिसर पराग जैन होंगे R&AW के चीफ

RAW Chief Parag Jain: 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी पराग जैन को रॉ का नया प्रमुख नियुक्त किया गया. उनकी नियुक्ति को सुरक्षा विशेषज्ञों ने सकारात्मक कदम बताया है. वे 1 जुलाई से कार्यभार संभालेंगे.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

केंद्र सरकार ने 1989 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पराग जैन को रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) का नया प्रमुख नियुक्त किया है. इस नियुक्ति को कैबिनेट की संबंधित समिति द्वारा मंजूरी दी गई.

पराग जैन 1 जुलाई 2025 से अपना कार्यभार संभालेंगे और वर्तमान रॉ प्रमुख रवि सिन्हा का स्थान लेंगे. यह नियुक्ति दो साल की अवधि के लिए या आगे के आदेश तक, जो भी पहले हो, के लिए की गई है, जैसा कि फाइनेंशियल Rules (FR) 56(d) और ऑल इंडिया सर्विसेज (डेथ-कम-रिटायरमेंट बेनिफिट्स) Rules, 1958 के तहत प्रावधानों के अनुसार है.

ऑपरेशन सिंदूर में रही अहम भूमिका

पराग जैन का करियर उनकी बुद्धिमत्ता और रणनीतिक कौशल के लिए जाना जाता है. विशेष रूप से, उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो एक जटिल खुफिया अभियान था. इस ऑपरेशन में आतंकवादी नेटवर्क्स के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की गई थी. उनके इस योगदान को देखते हुए उनकी नियुक्ति को सुरक्षा विशेषज्ञों द्वारा सकारात्मक कदम माना जा रहा है. जैन के पास 35 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें विभिन्न खुफिया और प्रशासनिक पदों पर काम करने का अनुभव शामिल है.

पराग अब विदेश में खुफिया मिशनों को अंजाम देने वाली एजेंसी का नेतृत्व करेंगे, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय खुफिया संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. उनकी नियुक्ति का ऐलान मिनिस्‍ट्री ऑफ पर्सनल, पब्लिक ग्रिवेंसेस एंड पेंशंस, डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग द्वारा किया गया.

इस संबंध में जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन में कैबिनेट सचिव समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया है.

साइबर खतरों से निपटने की चुनौती

पराग जैन के सामने रॉ को आधुनिक चुनौतियों, जैसे साइबर खतरों और क्षेत्रीय अस्थिरता से निपटने की जिम्मेदारी होगी. उनकी नियुक्ति से सुरक्षा क्षेत्र में एक नई ऊर्जा की उम्मीद जताई जा रही है.

नियुक्ति पर विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पराग जैन के अनुभव और नेतृत्व से रॉ को नई दिशा मिलेगी, खासकर जब देश आतंकवाद और सीमा पार गतिविधियों से निपटने की चुनौतियों का सामना कर रहा है. उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब अमरनाथ यात्रा और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है.



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