संसद के मौजूदा सत्र में जिस मुद्दे को लेकर लगातार तनातनी बनी हुई थी, अब उस पर सुलह की संभावना दिखाई दे रही है. हाल ही में निलंबित किए गए आठ सांसदों का निलंबन वापस लिया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को संसद में एक प्रस्ताव लाकर इस फैसले को रद्द किया जा सकता है, जिससे ये सभी सांसद दोबारा सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे.
सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति
दरअसल, सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने एक सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलाई थी. इस बैठक का मुख्य एजेंडा यही था कि सदन की कार्यवाही में आ रही रुकावटों को कैसे दूर किया जाए. बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के दिग्गज नेता शामिल हुए. काफी चर्चा के बाद दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि अगर सदन को सही ढंग से चलाना है, तो कड़वाहट को कम करना होगा. इसी सहमति का नतीजा है कि अब उन आठ सांसदों को फिर से सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा.
क्या हैं शर्तें?
बैठक में यह तय किया गया है कि निलंबन वापसी के साथ ही इन सांसदों को कड़ी हिदायत भी दी जाएगी. उनसे उम्मीद की गई है कि वे सदन की मर्यादा और अनुशासन का पूरा ख्याल रखेंगे. भविष्य में किसी भी तरह की अमर्यादित भाषा या आचरण से बचने की सलाह भी दी गई है.
इस निलंबन को रद्द करने का प्रस्ताव विपक्ष की ओर से पेश किया जा सकता है, जिसे सत्ता पक्ष का समर्थन मिलने की संभावना है.
क्या था पूरा विवाद?
यह पूरा मामला बजट सत्र के दौरान हुए जबरदस्त हंगामे से जुड़ा है. सदन की कार्यवाही में बाधा डालने और स्पीकर की कुर्सी की ओर कागज उछालने जैसे गंभीर आरोपों के चलते इन सांसदों पर गाज गिरी थी. निलंबित होने वालों में कांग्रेस के सात सांसद हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, मणिक्कम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, किरण कुमार रेड्डी, प्रशांत पाडोले, डीन कुरियाकोस और सीपीएम के एस. वेंकटेशन शामिल थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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