Petrol diesel excise duty cut India 2026: केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और निर्यात क्षमता को मजबूत करने के लिए पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) से जुड़े टैक्स स्ट्रक्चर में तत्काल प्रभाव से बड़े बदलाव लागू कर दिए हैं. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोल पर बेसिक एक्साइज ड्यूटी (Petrol diesel excise duty) को 13 रुपये से घटाकर मात्र 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि डीजल पर इसे 10 रुपये से घटाकर शून्य (Zero) कर दिया गया है.
बता दें कि सरकार का यह कदम घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने और तेल कंपनियों के टैक्स ढांचे को तर्कसंगत बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है. हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि इन बदलावों का प्राथमिक उद्देश्य निर्यात और आयात के बीच संतुलन बनाना है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय तेल की प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहे.
डीजल पर ₹18.5 का शुल्क, पेट्रोल को मिली छूट
सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Petrol diesel excise duty) नियम, 2017 में संशोधन करते हुए निर्यात किए जाने वाले ईंधन पर नई दरें तय की हैं. अब विदेशों को भेजे जाने वाले हाई-स्पीड डीजल पर 18.5 रुपये प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) लगेगा, जबकि पेट्रोल के निर्यात पर इस शुल्क को शून्य रखा गया है. यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि इससे भारतीय रिफाइनरियों को पेट्रोल निर्यात करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.
वहीं सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (PSUs) के लिए एक विशेष राहत दी गई है. यदि वे नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों को ईंधन की आपूर्ति करती हैं, तो उन पर पुराने रियायती नियम ही लागू रहेंगे, जिससे क्षेत्रीय कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध प्रभावित न हों.
एविएशन सेक्टर को ‘उड़ान’ की उम्मीद
हवाई ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतों से जूझ रही एयरलाइंस कंपनियों के लिए भी सरकार ने राहत का पिटारा खोला है. हालांकि एटीएफ पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को तकनीकी रूप से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति लीटर किया गया था, लेकिन एक अन्य जनहित अधिसूचना के जरिए इसमें बड़ी छूट दी गई है, जिससे प्रभावी दर अब केवल 29.5 रुपये प्रति लीटर रह गई है.
इसके अलावा विदेशी एयरलाइंस को ईंधन की आपूर्ति करने या एटीएफ का निर्यात करने पर बेसिक एक्साइज ड्यूटी और कृषि उपकर (AIDC) से पूरी तरह छूट दे दी गई है. सबसे बड़ी राहत आयातित एटीएफ पर मिली है जहां अतिरिक्त कस्टम ड्यूटी को हटा दिया गया है, जिससे विदेशी विमानों के लिए भारत में ईंधन भरवाना अब काफी किफायती हो जाएगा.
आम जनता की जेब पर असर पड़ेगा?
सरकार के इस फैसले से सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या पेट्रोल और डीजल के दाम कम होंगे? तकनीकी रूप से एक्साइज ड्यूटी (Petrol diesel excise duty) में कटौती सरकार के राजस्व को कम करती है और तेल कंपनियों की लागत घटाती है. जानकारों का मानना है कि इस कटौती से तेल कंपनियों के पास कीमतों को कम करने या कम से कम स्थिर रखने का मार्जिन बढ़ गया है.
चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अभी भी अनिश्चित हैं इसलिए सरकार ने यह ‘कुशन’ तैयार किया है ताकि वैश्विक संकट का सीधा बोझ आम आदमी की जेब पर न पड़े. अब गेंद तेल कंपनियों के पाले में है कि वे इस टैक्स कटौती का कितना लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाती हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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