दशहरे पर पीएम मोदी का बड़ा संदेश
Dussehra 2026: दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित डीडीए उत्सव ग्राउंड में आयोजित विजयादशमी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने पारंपरिक तरीके से रावण दहन किया और देशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं दीं. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और बुराई पर अच्छाई की जीत के इस प्रतीक पर्व को उत्साह के साथ मनाया.
विजयादशमी के महत्व पर दिया संदेश
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक भी है. उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें कर्तव्य, मर्यादा और न्याय का मार्ग दिखाता है. उनके अनुसार, इस पर्व से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के हित में आगे बढ़ना चाहिए.
राम राज्य की अवधारणा का किया जिक्र
पीएम मोदी ने अपने भाषण में राम राज्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका अर्थ ऐसा प्रशासन है, जहां सभी लोगों के साथ समान व्यवहार हो. उन्होंने कहा कि शासन व्यवस्था का उद्देश्य हर नागरिक को न्याय उपलब्ध कराना और आगे बढ़ने के अवसर देना होना चाहिए. किसी भी प्रकार के भेदभाव के बिना समाज के सभी वर्गों को समान महत्व मिलना ही राम राज्य की पहचान है.
देश के सामने मौजूद तीन चुनौतियां
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भी कुछ ऐसी ताकतें मौजूद हैं जो देश की प्रगति और एकता के लिए चुनौती बन रही हैं. उन्होंने बताया कि राष्ट्र के सम्मान को नुकसान पहुंचाने वाली सोच, समाज में विभाजन पैदा करने वाले तत्व और भारतीय संस्कृति के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले लोग देश के लिए बड़ी चुनौती हैं. इन सभी का मुकाबला सामूहिक शक्ति से ही किया जा सकता है.
एकता और संस्कृति की रक्षा पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सामाजिक सौहार्द बनाए रखें और देश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाएं. उनके मुताबिक, विजयादशमी का पर्व भी हमें यही संदेश देता है कि हमें गलत प्रवृत्तियों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए.
गरीब और वंचितों की सेवा को बताया जरूरी
पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी आदर्श व्यवस्था की पहचान यह होती है कि वहां कमजोर और जरूरतमंद लोगों की चिंता की जाए. उन्होंने कहा कि समाज और सरकार दोनों का दायित्व है कि वे उन लोगों की मदद करें जिन्हें अवसरों और संसाधनों की जरूरत है. जनकल्याण की भावना ही अच्छे शासन की असली कसौटी है.
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आत्मनिर्भर और विकसित भारत का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को दोहराया. उन्होंने कहा कि जब देश के नागरिक मिलकर काम करते हैं तो बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. पीएम ने लोगों से सामूहिक प्रयास, कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की अपील करते हुए कहा कि यही विजयादशमी का वास्तविक संदेश है.
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