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महात्‍मा बुद्ध से जुड़े अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का दिल्ली में उद्घाटन करेंगे PM मोदी, 127 साल बाद हुई वापसी

Buddha Relics: पीएम मोदी दिल्ली में महात्‍मा बुद्ध के पिपरहवा अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे. यह प्रदर्शनी बौद्ध संस्कृति को बढ़ावा देगी और युवाओं को इतिहास से जोड़ेगी. ये अवशेष 127 साल बाद भारत वापस लाए गए हैं.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Buddha Relics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 जनवरी को दिल्ली के राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र अवशेषों की एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे. यह कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुरू होगा. प्रदर्शनी का नाम “द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन” है.

यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के विचारों को लोगों तक पहुंचाने का एक बड़ा कदम है.

समृद्ध संस्कृति से जोड़ने का प्रयास

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बारे में पोस्ट किया. उन्होंने लिखा कि यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के अच्छे विचारों को और ज्यादा लोकप्रिय बनाने में मदद करेगी. यह हमारे युवाओं को अपनी समृद्ध संस्कृति से जोड़ने का भी प्रयास है. पीएम ने उन लोगों की सराहना की जिन्होंने इन अवशेषों को भारत वापस लाने में मेहनत की. उन्होंने कहा कि 3 जनवरी इतिहास और संस्कृति से प्यार करने वालों के लिए खास दिन है.

पिपरहवा अवशेषों की कहानी

ये अवशेष पिपरहवा से हैं, जो उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में एक प्राचीन बौद्ध स्थल है. यहां भगवान बुद्ध ने अपना शुरुआती जीवन बिताया था. 1898 में ब्रिटिश इंजीनियर विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने एक स्तूप की खुदाई में ये अवशेष खोजे. औपनिवेशिक काल में ज्यादातर अवशेष कोलकाता के इंडियन म्यूजियम में रखे गए. कुछ हिस्सा पेप्पे के परिवार के पास रहा और विदेश चला गया. अब 127 साल बाद, जुलाई 2025 में इन्हें भारत वापस लाया गया.

अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी की खासियतें

इस प्रदर्शनी को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया है. इसका केंद्र सांची स्तूप से प्रेरित एक मॉडल है. यहां राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली और इंडियन म्यूजियम, कोलकाता के असली अवशेष रखे गए हैं. साथ ही विदेश से लौटे अवशेष भी दिखाए जाएंगे. अन्य हिस्सों में पिपरहवा की फिर से खोज, भगवान बुद्ध के जीवन की झलकियां, बौद्ध शिक्षाओं की कलात्मक भाषा, बौद्ध कला का दुनिया में फैलाव और सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी जैसे विषय हैं.

अपनी संस्कृति से जुड़ सकेगी युवा पीढ़ी

इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में ऑडियो-विजुअल सुविधाएं हैं. इसमें इमर्सिव फिल्में, डिजिटल मॉडल, प्रोजेक्शन और मल्टीमीडिया शो हैं. इनसे भगवान बुद्ध का जीवन, अवशेषों की खोज, उनके संदेश और कला की आसान जानकारी मिलेगी. यह सब आम लोगों की समझ बढ़ाने के लिए बनाया गया है. प्रदर्शनी से युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति से जुड़ सकेगी.

यह प्रदर्शनी भारत की सांस्कृतिक धरोहर को मजबूत करने का हिस्सा है. पीएम मोदी ने कहा कि यह भगवान बुद्ध के विचारों को फैलाने की हमारी प्रतिबद्धता दिखाती है. अवशेषों की वापसी से इतिहास के एक हिस्से को फिर से जीवित किया गया है.

यह कार्यक्रम दिल्ली में होगा, लेकिन इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा. लोग यहां आकर बौद्ध संस्कृति के बारे में जान सकेंगे.

भारत की धरोहर वापसी का प्रयास

अवशेषों की वापसी भारत के निरंतर प्रयासों का नतीजा है. कई सालों से सरकार विदेशों में फंसी धरोहरों को वापस लाने में लगी है. पिपरहवा अवशेष इसका बड़ा उदाहरण हैं. इससे युवाओं में इतिहास के प्रति रुचि बढ़ेगी. प्रदर्शनी से बौद्ध कला और विचारों का फैलाव भी समझ आएगा.

यह प्रदर्शनी 3 जनवरी से शुरू होगी और लोग इसे देख सकेंगे. पीएम मोदी ने सभी को आमंत्रित किया है. यह एक ऐसा अवसर है जहां इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिकता एक साथ मिलेगी. इससे भारत की समृद्ध विरासत दुनिया को दिखेगी.

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