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भारत की ‘अभेद्य’ दीवार ELF, चीन के मंसूबों पर ‘रणनीतिक प्रहार’; पीएम मोदी ने दिखाई ताकत

Assam ELF Airstrip Importance: असम में बना ELF चीन सीमा से महज 300 किमी दूर एक सख्त संदेश है. पीएम मोदी ने इसका उद्घाटन कर बता दिया है कि भारत का हाईवे अब सिर्फ गाड़ियों का रास्ता नहीं, बल्कि वायुसेना का रनवे भी है.

Assam ELF Airstrip Importance

Assam ELF Airstrip Importance: पीएम मोदी ने शनिवार को असम में एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की. उन्होंने पूर्वोत्तर भारत के पहले इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) पर सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान से लैंडिंग कर देश की रक्षा तैयारियों का शंखनाद किया. असम के मोरान में नेशनल हाईवे-37 पर बनी यह 4.2 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी न केवल इंफ्रास्ट्रक्चर का एक बेहतरीन नमूना है, बल्कि चीन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत की ‘रणनीतिक हुंकार’ भी है.

300 किमी दूर है ड्रैगन

यह एयरस्ट्रिप चीन सीमा (LAC) से महज 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इसका सामरिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि युद्ध जैसी स्थितियों में दुश्मन सबसे पहले एयरबेस और रनवे को निशाना बनाते हैं. ऐसे में यह हाईवे ‘बैकअप रनवे’ के तौर पर काम करेगा, जिससे भारतीय वायुसेना (IAF) की ऑपरेशनल क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.

पूर्वोत्तर के लिए क्यों है यह ‘संजीवनी’?

अरुणाचल प्रदेश और असम की सीमाएं चीन के लिए हमेशा संवेदनशील रही हैं. तवांग और डोकलाम जैसे विवादों के बीच, यह एयरस्ट्रिप वायुसेना को त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response) देने की ताकत देगी. असम की सीमाएं बांग्लादेश और भूटान से भी मिलती हैं. पड़ोसी देशों में राजनीतिक अस्थिरता के बीच यह सुविधा भारत की सीमाओं को अभेद्य बनाएगी.

हवाई ताकत का प्रदर्शन

पीएम मोदी के सामने वायुसेना ने 40 मिनट तक अपने शौर्य का प्रदर्शन किया. सुखोई-30 MKI और राफेल जैसे घातक फाइटर जेट्स ने इस हाईवे को छूकर उड़ान भरी. गरुड़ कमांडोज की घातक सटीकता और एएन-32 ट्रांसपोर्ट विमान की लैंडिंग ने दुश्मन को कड़ा संदेश दिया.

सामान्य सड़क से कैसे अलग है यह ELF?

  • यह कोई साधारण सड़क नहीं है. इसे खास तकनीक और कंक्रीट की मजबूत लेयरिंग के साथ तैयार किया गया है.
  • क्षमता: यह पट्टी 40 टन वजनी लड़ाकू विमानों और 74 टन वजनी भारी ट्रांसपोर्ट विमानों का भार सह सकती है.
  • डिजाइन: इस 4.2 किमी के हिस्से में कोई डिवाइडर नहीं है. दोनों तरफ फेंसिंग लगाई गई है ताकि विमानों की आवाजाही सुरक्षित रहे. आपातकाल में इसे तुरंत रनवे में बदला जा सकता है.

बाढ़ और आपदा में मददगार

असम हर साल भीषण बाढ़ का सामना करता है. जब मुख्य सड़कें और एयरबेस पानी में डूब जाते हैं या संपर्क कट जाता है, तब यह ऊंचा और मजबूत हाईवे राहत सामग्री पहुंचाने और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए ‘लाइफलाइन’ साबित होगा.

पीएम मोदी का ऐतिहासिक टचडाउन

प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इस हाईवे पर लैंड करके इसका उद्घाटन किया. यह पहली बार है जब देश के पीएम ने पूर्वोत्तर के किसी हाईवे पर इस तरह लैंडिंग की हो. पीएमओ के मुताबिक, मोदी दिल्ली से सुबह 7:15 बजे चले और चाबुआ एयरबेस होते हुए सीधे मोरान हाईवे पर उतरे. इसके बाद वे गुवाहाटी के लिए रवाना हुए, जहां वे 5,500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे.

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भविष्य की रणनीति: ‘ऐक्ट ईस्ट’ का नया अध्याय

राजस्थान के बाड़मेर और यूपी के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बाद अब पूर्वोत्तर में ELF का बनना भारत की बदलती रक्षा नीति का सबूत है. केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे भारत के ‘रणनीतिक संकल्प’ का प्रतीक बताया. यह सुविधा न केवल रक्षा बल्कि सिविल एविएशन के लिए भी एक विकल्प के तौर पर काम करेगी. इस प्रोजेक्ट पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, लेकिन इसकी अहमियत अनमोल है. यह हाईवे अब सिर्फ गाड़ियों का रास्ता नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा का ‘रनवे’ बन चुका है.



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