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गर्मियों से पहले पीएम मोदी का ‘जल संचय’ मंत्र, बताई 3 गांवों की प्रेरक कहानियां

PM Modi On Water Conservation: पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में गर्मियों से पहले जल संरक्षण का संकल्प दोहराया. उन्होंने देश में बने 70 हजार अमृत सरोवरों का जिक्र करते हुए त्रिपुरा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के गांवों की शानदार पहल की सराहना की.

PM Modi On Water Conservation

फाइल फोटो

PM Modi On Water Conservation: पीएम मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ में जल संरक्षण पर जोर दिया. उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में 50 लाख वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं और 70 हजार अमृत सरोवर बनाए गए. इसके साथ ही पीएम ने त्रिपुरा के वांगमुन, छत्तीसगढ़ के कोरिया और तेलंगाना के मुधिगुंटा में गांवों के जल संकट से निपटने की प्रेरक प्रयासों का भी जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा कि-

‘देश के कई हिस्सों में गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है. ये समय जल संरक्षण के अपने संकल्प को फिर से दोहराने का है. पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों को बहुत जागरूक बनाया है. इस अभियान के तहत देशभर में करीब 50 लाख आर्टिफिशियल वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाए गए हैं.’

सामुदायिक प्रयासों का सराहा

उन्होंने आगे कहा कि मुझे ये देखकर अच्छा लगता है कि अब जल संकट से निपटने के लिए गांव-गांव में सामुदायिक स्तर पर प्रयास होने लगे हैं. कहीं पुराने तालाबों की सफाई हो रही है, कहीं बरसात के जल को सहेजने के लिए प्रयास किया जा रहा हैं. अमृत सरोवर अभियान के तहत भी देशभर में करीब 70 हजार अमृत सरोवर बनाए गए हैं. बारिश का मौसम आने से पहले इन सरोवरों की साफ-सफाई भी शुरू हो गई है.”

पीएम मोदी ने बताया कि त्रिपुरा की जंपुई पहाड़ियों में बसा वांगमुन गांव 3000 फीट की ऊंचाई पर बसा है. ये गांव पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहा था. गर्मियों के दिनों में गांव के लोग पानी के लिए लंबी दूरी तय करते थे. आखिरकार गांव के लोगों ने बारिश की हर बूंद को सहेजने का निर्णय किया. आज वांगमुन गांव के लगभग हर घर में रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित हो गया है. जो गांव कभी पानी की कमी से जूझ रहा था, वो जल संरक्षण की एक प्रेरक मिसाल बन गया है.

कोरिया की पहल सुनाई

उन्होंने बताया कि इसी तरह छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी एक अनोखी पहल देखने को मिली. यहां के किसानों ने एक सरल लेकिन प्रभावशाली आइडिया पर काम किया. यहां के किसानों ने अपने खेतों में छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाएं जिससे बारिश का पानी खेतों में ही रुकने लगा और धीरे-धीरे वह जमीन के अंदर जाने लगा. आज इस क्षेत्र के 1200 से अधिक किसान इस मॉडल को अपना चुके हैं और गांव का ग्राउंड वाटर लेवल बहुत बेहतर हो गया है.

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प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी तरह तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गांव में भी लोगों ने मिलकर पानी की समस्या दूर की है. गांव के 400 परिवारों ने अपने घरों में सोख गड्ढे बनाए और जल संरक्षण का जन-आंदोलन बना दिया. इससे गांव का ग्राउंड वाटर लेवल बेहतर हुआ है, साथ ही प्रदूषित पानी की वजह से होने वाली बीमारियां बहुत कम हो गई हैं.



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