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जिनका नाम सुनकर कांप जाते थे जमींदार! विनोबा भावे की जयंती पर पीएम मोदी ने क्या लिखा?

एक ऐसा संत जिसने बिना किसी हथियार या कानून के, देश के बड़े-बड़े जमींदारों से लाखों एकड़ जमीन दान में मांगकर भूमिहीन गरीबों में बांट दी. आचार्य विनोबा भावे की जयंती पर पीएम मोदी ने उन्हें याद करते हुए एक संदेश दिया है.

Prime Minister Narendra Modi paying tribute to the founder of the Bhoodan Movement, Acharya Vinoba Bhave, on his birth anniversary, highlighting his message of 'Jai Jagat' and humanity.

“जय जगत” यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि विश्व शांति, भाईचारे और मानवता को हर सीमा से ऊपर रखने वाला एक महामंत्र था. और यह महामंत्र देने वाले संत थे आचार्य विनोबा भावे (Acharya Vinoba Bhave). आज 11 सितंबर 2026 को पूरे देश में महात्मा गांधी के इस सबसे करीबी सहयोगी और ‘भूदान आंदोलन’ के प्रणेता की जयंती मनाई जा रही है. इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को याद किया है.

‘समानता और सेवा में था उनका अटूट विश्वास’

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक पोस्ट करते हुए लिखा, “आचार्य विनोबा भावे का ‘जय जगत’ (Jai Jagat) का आह्वान हर सीमा को पार करता था और मानवता को सर्वोपरि रखता था. उनके विभिन्न प्रयासों के माध्यम से उन्होंने सभी के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए काम किया. समानता, गरिमा और सेवा में उनका अटूट विश्वास सबसे हाशिए पर बैठे लोगों को शक्ति प्रदान करता था.”

कौन थे आचार्य विनोबा भावे?

11 सितंबर 1895 को जन्मे आचार्य विनोबा भावे का जीवन सादगी, सत्य और अहिंसा का जीवंत उदाहरण था. इतिहास में उनका नाम ‘भूदान आंदोलन’ (Bhoodan Movement) के लिए स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है. विनोबा भावे ने देश के भूमिहीन और गरीब किसानों के लिए जमींदारों से स्वेच्छा से भूमि दान करने का एक अनोखा और अहिंसक अभियान चलाया था. उनके इस आह्वान का ऐसा असर हुआ कि देश के बड़े-बड़े जमींदारों ने अपनी हजारों एकड़ जमीन गरीबों के लिए दान कर दी, जिससे लाखों किसानों को उनकी अपनी जमीन मिली.

नारी सशक्तिकरण और ग्राम स्वराज में योगदान

प्रधानमंत्री मोदी के संदेश में विनोबा भावे के उन आदर्शों पर भी जोर दिया गया जो आज भी प्रासंगिक हैं. विनोबा जी ने केवल भूमि सुधार ही नहीं, बल्कि शिक्षा, नारी सशक्तिकरण (Women Empowerment) और ग्राम स्वराज के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व कार्य किए. उनके कार्यों की नींव समानता और सेवा की भावना थी, जिसने समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया.

देशभर में आज राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और गांधीवादी संस्थान आचार्य विनोबा भावे को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से याद कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश राष्ट्र को यह याद दिलाता है कि विनोबा भावे जैसे महापुरुषों के आदर्शों पर चलकर ही एक समतामूलक, आत्मनिर्भर और समावेशी समाज का निर्माण संभव है.



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