पीएम मोदी 7 सितंबर को राज्य मंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे
PM Modi Ministers Meeting Today: केंद्र सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारने और प्रशासनिक दक्षता को नए मुकाम पर ले जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक्शन मोड में आ गए हैं. सोमवार (7 सितंबर) की शाम प्रधानमंत्री मोदी राज्य मंत्रियों (Ministers of State) और स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों के साथ एक बेहद अहम और हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग करने जा रहे हैं.
इस बैठक में अलग-अलग मंत्रालयों के कामकाज, सरकारी पहलों की प्रोग्रेस और खुद मंत्रियों के व्यक्तिगत परफॉर्मेंस का बारीकी से मूल्यांकन किया जाएगा. लुटियंस दिल्ली और राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को केवल एक सामान्य प्रशासनिक समीक्षा के रूप में नहीं बल्कि आगामी संभावित मोदी कैबिनेट फेरबदल की बड़ी तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है.
केवल चुनिंदा पोर्टफोलियो वाले मंत्री होंगे शामिल(PM Modi Ministers Meeting)
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा बुलाई गई इस बैठक की खास बात यह है कि इसमें सभी मंत्रियों के बजाय केवल उन राज्य मंत्रियों को आमंत्रित किया गया है जिनके पोर्टफोलियो सीधे तौर पर सामाजिक, आर्थिक और जन-कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े हैं.
सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा (Education), सामाजिक न्याय और अधिकारिता (Social Justice & Empowerment) तथा कृषि (Agriculture) जैसे अहम मंत्रालयों के कामकाज की विस्तृत समीक्षा इस सत्र का मुख्य एजेंडा रहेगी. पीएम मोदी हर मंत्री से उनके विभाग में हुए काम और मंत्रालयों के धरातल पर दिख रहे असर का सीधा हिसाब लेंगे.
चरणबद्ध तरीके से होगा रिपोर्ट कार्ड तैयार
बता दें कि आज शाम होने वाली यह बैठक एक सतत समीक्षा प्रक्रिया का पहला चरण (PM Modi Review Meeting) मानी जा रही है. आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री दूसरे पोर्टफोलियो संभालने वाले राज्य मंत्रियों के साथ भी इसी तरह की मैराथन बैठकें करने वाले हैं. सरकार का स्पष्ट संदेश है कि योजनाओं की गति धीमी नहीं होनी चाहिए और अधिकारियों पर प्रशासनिक पकड़ चुस्त-दुरुस्त होनी चाहिए. इस रिव्यू प्रोसेस से यह साफ हो जाएगा कि कौन सा मंत्रालय अपने लक्ष्यों को हासिल करने में सफल रहा है और कहां सुधार की गुंजाइश है.
कैबिनेट फेरबदल की क्यों है आहट?(Cabinet Reshuffle News)
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह ‘अकाउंटेबिलिटी ऑडिट’ (जवाबदेही जांच) केंद्र सरकार में संभावित फेरबदल या विस्तार का आधार बन सकती है. जो मंत्री उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं, उनकी जिम्मेदारी बदली जा सकती है या उन्हें संगठन के काम में लगाया जा सकता है. वहीं, बेहतर काम करने वाले युवा और ऊर्जावान राज्य मंत्रियों को बड़ी और स्वतंत्र जिम्मेदारियां मिलने का रास्ता साफ हो सकता है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


