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‘जनता और राष्ट्र की सेवा ही सुशासन का आधार’, पीएम मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषित, जानें इसका अर्थ

PM Modi Subhashitam: पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषित साझा कर जनता के कल्याण और सुशासन का संदेश दिया. जानें श्लोक का अर्थ, ‘सर्वकामधुक्’ का मतलब और कामंदकीय नीतिसार से इसका संबंध.

PM Modi Subhashitam

पीएम मोदी ने साझा किया सुभाषित

PM Modi Subhashitam: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें एक अच्छे शासक की जिम्मेदारियों और जनता के कल्याण का संदेश दिया गया है. इस श्लोक में बताया गया है कि किसी भी राजा या नेतृत्व की असली सफलता जनता की सेवा और उसके हितों की रक्षा करने में है. प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया यह संदेश सुशासन, लोक कल्याण और प्रकृति के महत्व को भी रेखांकित करता है.

पीएम मोदी ने जो संस्कृत श्लोक साझा किया, वह है

“पालयन् प्रकृतिं राजा सुखी भवति नान्यथा. प्रकृतिश्च हिता यस्य स राजा सर्वकामधुक्॥”

इसका भावार्थ है कि राजा अपनी प्रजा का उचित पालन-पोषण और उसकी रक्षा करके ही सुखी रह सकता है. जो शासक जनता के हितों का ध्यान रखता है और उसके कल्याण के लिए काम करता है, वही समृद्धि और खुशहाली का रास्ता तैयार कर सकता है.

क्या है इस संस्कृत श्लोक का संदेश?

इस श्लोक का मूल संदेश है कि शासन का उद्देश्य केवल सत्ता चलाना नहीं, बल्कि जनता की जरूरतों को समझना और उनके जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए. एक अच्छे शासक की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने लोगों के सुख-दुख को कितनी गंभीरता से समझता है और उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है.

अगर कोई राजा या नेतृत्व जनता की अनदेखी करता है, उसके हितों को नुकसान पहुंचाता है या केवल अपने फायदे के बारे में सोचता है, तो वह लंबे समय तक सुख और स्थिरता हासिल नहीं कर सकता. इसके उलट, जो नेतृत्व जनहित को प्राथमिकता देता है, उसे जनता का भरोसा और सहयोग मिलता है. यही भरोसा किसी भी राज्य या राष्ट्र की प्रगति में अहम भूमिका निभाता है.

प्राचीन ग्रंथ ‘कामंदकीय नीतिसार’ से जुड़ा है श्लोक

प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया यह श्लोक प्राचीन संस्कृत ग्रंथ ‘कामंदकीय नीतिसार’ से जुड़ा है. इस ग्रंथ के रचयिता आचार्य कामंदक माने जाते हैं. इसमें राजधर्म, शासन व्यवस्था और राजा के कर्तव्यों से संबंधित नीतियों का वर्णन मिलता है.


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इस श्लोक में ‘सर्वकामधुक्’ शब्द का विशेष महत्व है. इसका आशय ऐसे राजा से है, जो अपनी प्रजा की आकांक्षाओं को पूरा करने में समर्थ हो. इसकी तुलना कामधेनु से भी की जाती है, जिसे इच्छाओं की पूर्ति करने वाली गाय माना गया है. यानी जब शासन जनता के हित में काम करता है, तो समाज में सुख, शांति और समृद्धि का माहौल बन सकता है.

-भारत एक्सप्रेस



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