पीएम मोदी ने शेयर किया संस्कृत सुभाषित शोलक
PM Modi Sanskrit Shlok: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया. इस श्लोक के जरिए उन्होंने कठिन और विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने तथा उत्साह के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया. प्रधानमंत्री ने लिखा- “आपत्काले च कष्टेऽपि नोत्साहस्त्यज्यते बुधैः। इति प्रबोधितस्तेन कथञ्चिद् दृढबुद्धिना.”
इसका भावार्थ है कि संकट या कठिनाइयों के समय भी बुद्धिमान और दृढ़ संकल्प वाले लोग अपना उत्साह नहीं छोड़ते. परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, विवेक और आत्मविश्वास के साथ उनका सामना करना ही समझदारी है.
लगातार दे रहे हैं प्रेरक संदेश
प्रधानमंत्री मोदी पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर संस्कृत के प्रेरक सुभाषित साझा कर रहे हैं. इन श्लोकों के माध्यम से वह जीवन में परोपकार, आत्मसम्मान, साहस, धैर्य और सकारात्मक सोच जैसे मूल्यों पर जोर दे रहे हैं.
आपत्काले च कष्टेऽपि नोत्साहस्त्यज्यते बुधैः।
इति प्रबोधितस्तेन कथञ्चिद् दृढबुद्धिना।। pic.twitter.com/YsaWgE8LfN
— Narendra Modi (@narendramodi) August 20, 2026
बुधवार को भी उन्होंने एक संस्कृत श्लोक पोस्ट किया था- “एतावज्जन्मसाफल्यं देहिनामिह देहिषु। प्राणैरर्थैर्धिया वाचा श्रेय एवाचरेत्सदा॥” इसका संदेश था कि मानव जीवन की वास्तविक सार्थकता दूसरों के कल्याण में है. व्यक्ति को अपनी क्षमता, धन, बुद्धि और वाणी का उपयोग सदैव परोपकार तथा जनहित के कार्यों के लिए करना चाहिए.
स्वाभिमान और दृढ़ता पर भी जोर
इससे एक दिन पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री ने “उद्यच्छेदेव न नमेदुद्यमो ह्येव पौरुषम्। अप्यपर्वणि भज्येत न नमत्वेव कस्यचित्॥” श्लोक साझा किया था. इसके जरिए उन्होंने आत्मसम्मान, साहस और स्वाभिमान के साथ जीवन जीने का संदेश दिया.
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इस सुभाषित का भाव यह है कि व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए. सच्चा पुरुषार्थ वही है, जिसमें इंसान कठिन समय में भी सत्य, धैर्य और आत्मगौरव के साथ अपने आदर्शों पर कायम रहे. प्रधानमंत्री के लगातार साझा किए जा रहे ये संस्कृत सुभाषित जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण, सेवा भावना और दृढ़ संकल्प को महत्व देने का संदेश दे रहे हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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