पीएम मोदी ने शेयर किया सुभाषित
PM Modi Subhashit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर सुभाषित साझा किया. इस श्लोक के जरिए उन्होंने स्वतंत्रता, भय और दुख से मुक्ति के महत्व को सामने रखा. यह संदेश सिर्फ आध्यात्मिक दृष्टि से ही अहम नहीं है, बल्कि आम जीवन से भी जुड़ा है. इंसान अक्सर भविष्य की चिंता, दूसरों के दबाव और कुछ खोने के डर में जीता है. ऐसे में यह श्लोक मनुष्य को अपने भीतर झांकने और जीवन को समझने की प्रेरणा देता है.
क्या है पीएम मोदी के साझा किए गए श्लोक का अर्थ?
प्रधानमंत्री ने जो संस्कृत श्लोक साझा किया, वह है, “यावदस्यास्वतन्त्रत्वं तावदीश्वरतो भयम्. य एतत्समुपासीरंस्ते मुह्यन्ति शुचार्पिताः॥”
इसका भावार्थ है कि जब तक मनुष्य खुद को स्वतंत्र नहीं समझता और पराधीनता में जीता है, तब तक उसके मन में भय बना रहता है. इस सोच को ही जीवन का आधार मान लेने वाले लोग दुख और भ्रम से घिरे रहते हैं. इसका संदेश है कि सच्ची स्वतंत्रता केवल बाहरी बंधनों से छुटकारा पाने तक सीमित नहीं है. इंसान को अपने भीतर के डर और मानसिक गुलामी से भी मुक्त होना जरूरी है.
यावदस्यास्वतन्त्रत्वं तावदीश्वरतो भयम्।
य एतत्समुपासीरंस्ते मुह्यन्ति शुचार्पिताः॥ https://t.co/R3XXBeM2Cc
— Narendra Modi (@narendramodi) October 23, 2026
श्रीकृष्ण ने उद्धव को समझाया था जीवन का रहस्य
यह श्लोक श्रीमद्भागवत महापुराण के 11वें स्कंध के 10वें अध्याय का 33वां श्लोक बताया गया है. यह उद्धव गीता का हिस्सा है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्त उद्धव को जीवन, आत्मा और संसार के बारे में समझाते हैं.
इस श्लोक की आध्यात्मिक व्याख्या के अनुसार, जब मनुष्य खुद को केवल शरीर, मन और अहंकार तक सीमित मान लेता है, तो वह बाहरी परिस्थितियों से प्रभावित होने लगता है. सुख मिलने पर वह खुश होता है और दुख आने पर टूट जाता है. इसी तरह लाभ-हानि और सफलता-असफलता का डर उसके मन पर हावी रहने लगता है.
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असली आजादी का मतलब क्या है?
श्लोक का संदेश है कि संसार की हर चीज स्थायी नहीं है. इसके बावजूद जब इंसान धन, पद, रिश्तों और अपनी पहचान को ही सब कुछ मान लेता है, तो उन्हें खोने का डर उसे परेशान करता रहता है. यही डर धीरे-धीरे चिंता और दुख का कारण बन सकता है.
भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं के अनुसार, आत्मज्ञान के जरिए मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को समझ सकता है. ईश्वर के प्रति समर्पण और मोह से ऊपर उठने की भावना भी उसे मानसिक शांति पाने में मदद करती है.
-भारत एक्सप्रेस
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