PM Modi Japan Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त 2025 को दो दिवसीय जापान यात्रा पर टोक्यो पहुंचे, जो प्रधानमंत्री के रूप में उनकी आठवीं जापान यात्रा है. आज उन्होंने जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा से मुलाकात की और भारत-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम को संबोधित किया. पीएम मोदी ने भारत को निवेश के लिए सबसे बेहतर जगह बताया और जापानी कंपनियों से ‘मेक इन इंडिया’ में योगदान का आह्वान किया. दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया गया. जापान से भारत में अब तक 40 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हो चुका है, जो दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास को दर्शाता है.
हमारी साझेदारी भरोसे का प्रतीक: मोदी
टोक्यो पहुंचने पर पीएम मोदी का जापानी अधिकारियों और प्रवासी भारतीयों ने गर्मजोशी से स्वागत किया. स्थानीय कलाकारों ने गायत्री मंत्र, राजस्थानी लोकगीत और भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुत किए. जापानी महिला कलाकार मायोनी (हिंदी नाम मधु) ने ‘पधारो म्हारे देस’ गाकर मोदी का स्वागत किया. इस सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दोनों देशों की सभ्यतागत बंधनों को उजागर किया. मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत-जापान साझेदारी भरोसे का प्रतीक है, जो शांति, प्रगति और समृद्धि का साझा सपना लेकर चल रही है. उन्होंने इशिबा को अगले समिट के लिए भारत आने का न्योता भी दिया.

आर्थिक साझेदारी और निवेश की मजबूती
मोदी ने भारत-जापान आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया की नजरें ही नहीं, भरोसा भी भारत पर है. उन्होंने भारत को जल्द तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की बात कही और जापानी कंपनियों से ‘भारत में बनाओ, दुनिया के लिए बनाओ’ का आह्वान किया. जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JETRO) के सर्वे का हवाला देते हुए मोदी ने बताया कि 80% जापानी कंपनियां भारत में कारोबार विस्तार चाहती हैं और 75% कंपनियां यहां मुनाफा कमा रही हैं. उन्होंने कहा, ‘भारत में पूंजी सिर्फ बढ़ती नहीं, बल्कि कई गुना हो जाती है.’ जापान ने 2000-2024 के बीच भारत में 37 लाख करोड़ रुपये का FDI किया, जिसमें ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल, दूरसंचार, केमिकल, वित्त और फार्मा सेक्टर शामिल हैं. 2022-23 में 14,000 करोड़ और 2023-24 में 26,000 करोड़ का निवेश हुआ. मोदी ने अगले 10 सालों में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन (करीब 6 लाख करोड़ रुपये) निवेश का लक्ष्य रखा, जिसमें MSME और स्टार्टअप को जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया.
जापानी पीएम इशिबा ने कहा कि भारतीय टैलेंट और जापानी तकनीक एक-दूसरे के लिए बने हैं. उन्होंने 6 साल पहले वाराणसी यात्रा का जिक्र करते हुए भारत के इतिहास से प्रभावित होने की बात कही और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को लगातार बेहतर बताया.
भारत का जापान पर ‘आंख मूंदकर’ भरोसा
पीएम मोदी की जापान यात्रा यूं ही नहीं है; यह दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक संबंधों का प्रमाण है. भारत जापान पर ‘आंख मूंदकर’ भरोसा करता है, और इसके पीछे कई कारण हैं. सबसे पहले, दोनों देश एशिया के अग्रणी लोकतंत्र और दुनिया की टॉप 5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं. भारत-जापान संबंध 2000 में वैश्विक साझेदारी से शुरू होकर 2014 में विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी तक पहुंचे हैं. पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे और मोदी के बीच वार्षिक समिट ने इसे मजबूती दी. भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव जापान की मुक्त इंडो-पैसिफिक नीति से जुड़ी हैं. जापान भारत का सबसे बड़ा विदेशी विकास सहायता (ODA) डोनर है. दोनों देश क्वाड, इंटरनेशनल सोलर अलायंस जैसे बहुपक्षीय प्लेटफॉर्म पर सहयोग करते हैं. डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और हिंद-प्रशांत में अनिश्चितताओं के बीच दोनों देश रणनीतिक दृष्टिकोण साझा करेंगे. रक्षा क्षेत्र में 2008 की सुरक्षा घोषणा से लेकर 2024 के यूनिकॉर्न नेवल मास्ट तक सहयोग है. मालाबार अभ्यास और तटरक्षक ड्रिल नियमित हैं.

5 पॉइंट्स में भारत-जापान की पार्टनरशिप
निवेश और आर्थिक सहयोग: जापान ने भारत में 22.8 अरब डॉलर से अधिक का ODA प्रदान किया है, जो बुनियादी ढांचे जैसे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल में दिखता है. जापानी कंपनियां मेट्रो, विनिर्माण, सेमीकंडक्टर और स्टार्टअप में सक्रिय हैं.
रणनीतिक साझेदारी: इंडो-पैसिफिक में स्थिरता के लिए दोनों देश क्वाड में भागीदार हैं. जापान भारत की सुरक्षा चिंताओं को समझता है और चीन के विस्तारवाद के खिलाफ खड़ा है.
सांस्कृतिक और सभ्यतागत बंधन: बौद्ध धर्म से जुड़े ऐतिहासिक संबंध दोनों देशों को करीब लाते हैं. जापान भारत की सॉफ्ट पावर का सम्मान करता है.
तकनीकी हस्तांतरण: जापान की उन्नत तकनीक भारत के विकास में मदद करती है, जैसे शिंकानसेन टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर प्लांट.
भरोसे की नींव: जापान कभी भारत के खिलाफ नहीं रहा; हमेशा सहयोगी. राजनीतिक स्थिरता और पारदर्शिता दोनों देशों के संबंधों की कुंजी है.
एजेंडा: 100 से ज्यादा MoU पर हस्ताक्षर
इस यात्रा का मुख्य एजेंडा 100 से ज्यादा MoU पर हस्ताक्षर है. मोदी और इशिबा की मौजूदगी में हाइड्रोजन-अमोनिया और खनिज से जुड़े MoU पर हस्ताक्षर हुए. दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के लिए नया फ्रेमवर्क बनाने पर चर्चा हुई. सेमीकंडक्टर, कम्युनिकेशन, क्लीन एनर्जी, मेडिसिन सप्लाई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर नई पहल की शुरुआत संभव है. रक्षा, चिप्स और रेयर अर्थ मटेरियल को एजेंडे में प्राथमिकता दी गई. मोदी ने सेमीकंडक्टर से लेकर स्टार्टअप तक हर क्षेत्र में साझेदारी को आपसी विश्वास का प्रतीक बताया. पीएम मोदी की यह यात्रा भारत की विकास यात्रा में जापान की भूमिका को और मजबूत करेगी, जहां टैलेंट पावरहाउस भारत और तकनीकी दिग्गज जापान साथ मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करेंगे.
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