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PM Modi Fasting Rules: नवरात्रि में PM मोदी का विशेष नियम, सिर्फ एक ही फल से करते हैं व्रत

PM Modi Fasting Rules: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवरात्रि के दौरान नौ दिनों का कठोर उपवास रखते हैं. लेक्स फ्रिडमैन संग बातचीत में उन्होंने उपवास से जुड़े अपने अनुभव के बारे में शेयर किया.

PM Modi Fasting Rules: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर साल नवरात्रि के दौरान पूरे नौ दिनों का कठोर उपवास रखते हैं. लेकिन यह व्रत केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके लिए जीवन का एक अनुशासन और आत्मअनुभूति का माध्यम भी है. अमेरिकी पॉडकास्टर लेक्स फ्रिडमैन से बातचीत में पीएम मोदी ने उपवास से जुड़े अपने निजी अनुभव, तैयारी और उसके वैज्ञानिक-आध्यात्मिक पहलुओं पर विस्तार से बात की.

45 घंटे के उपवास पर पीएम मोदी का अनुभव

इंटरव्यू के दौरान फ्रिडमैन ने बताया कि वे खुद 45 घंटे से उपवास पर थे, ताकि इस प्रक्रिया को महसूस कर सकें. इसी संदर्भ में जब उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया तो पीएम मोदी ने अपने दशकों पुराने उपवास के अनुभव साझा किए.

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में वर्षा ऋतु के दौरान चातुर्मास की परंपरा है. इस दौरान पाचन क्रिया धीमी हो जाती है, इसलिए वे जून से दीपावली तक करीब चार महीने एक ही समय भोजन करते हैं. नवरात्रि में उनका उपवास और कठोर हो जाता है.

उन्होंने बताया ‘नवरात्रि के नौ दिन मैं सिर्फ़ गर्म पानी पीता हूं. कभी-कभी एक ही फल चुन लेता हूं और वही नौ दिन तक खाता हूं. जैसे अगर पपीता चुना तो रोज़ सिर्फ़ वही. और यह सब मैं पिछले 50-55 सालों से कर रहा हूं.’

जानें उपवास का असली अर्थ

प्रधानमंत्री ने साफ़ किया कि उपवास का मतलब सिर्फ़ खाना छोड़ना नहीं है. ‘अगर किसी को मजबूरी में भोजन न मिले तो उसे उपवास नहीं कह सकते. उपवास एक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है. यह शरीर और मन, दोनों को गढ़ने का जरिया है.’

पीएम मोदी ने बताया कि लंबे उपवास के लिए वे 5-7 दिन पहले से तैयारी शुरू करते हैं. योग और आयुर्वेदिक पद्धतियों का सहारा लेते हैं और भरपूर पानी पीते हैं. इससे शरीर डिटॉक्सिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरता है और उपवास के लिए तैयार हो जाता है.

उनके मुताबिक उपवास का मतलब है समर्पण और अनुशासन. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘व्रत के दौरान मैं बाहर की गतिविधियां पूरी करता हूं, लेकिन मन भीतर ही रहता है. यह आत्मा से जुड़ने का अनुभव होता है. न मैं किसी किताब से प्रभावित हूं और न ही पारिवारिक परंपरा से. यह मेरा निजी अनुभव है.’

पहला उपवास और नई चेतना

पीएम मोदी ने याद किया कि उनका पहला उपवास स्कूली दिनों में हुआ था, जब वे गोरक्षा आंदोलन से जुड़े कार्यक्रम में शामिल हुए. ‘तब मैंने महसूस किया कि उपवास सिर्फ़ खाने-पीने से जुड़ा नहीं है, यह तो एक विज्ञान है. उसी दिन से मेरे भीतर एक नई चेतना और ऊर्जा का संचार हुआ.’

जिम्मेदारियों के साथ उपवास

प्रधानमंत्री ने कहा कि उपवास के बावजूद उन्होंने कभी अपनी जिम्मेदारियों में कमी नहीं आने दी. उन्होंने एक किस्सा सुनाया ‘बराक ओबामा के साथ द्विपक्षीय बैठक और डिनर था. जब उन्हें पता चला कि मैं कुछ खाऊंगा नहीं, तो वे चौंक गए. मैंने गर्म पानी मंगवाया और कहा मेरा डिनर आ गया है. अगली बार जब मिले तो उन्होंने मजाक में कहा कि अब आपको लंच में डबल खाना पड़ेगा.’

मोदी ने उपवास से होने वाले आंतरिक बदलावों पर भी रोशनी डाली. उन्होंने कहा कि उपवास से इंद्रियां कई गुना अधिक सक्रिय हो जाती हैं. ‘चाय की महक दूर से महसूस हो जाती है, सोचने-समझने की क्षमता तेज हो जाती है. विचारों में नयापन आता है और आप आउट ऑफ बॉक्स सोच पाते हैं.’

पीएम मोदी के लिए उपवास का मतलब

इस बातचीत में मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया कि उपवास उनके लिए केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, आत्मसमर्पण और जीवन को गढ़ने का माध्यम है. यही कारण है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वे इस परंपरा को उसी कठोरता और संयम के साथ निभाते आ रहे हैं.

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-भारत एक्सप्रेस 



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