हार के बाद टूटा PK का मौन
Prashant Kishor Interview: बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी को एक भी सीट पर जीत न मिलने और NDA की प्रचंड जीत के बाद, चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने अपना मौन तोड़ते हुए पहला इंटरव्यू दिया है. इस दौरान उन्होंने अपनी हार के कारणों, विपक्ष की रणनीति पर तीखे सवाल उठाए, और भविष्य की योजनाओं के बारे में खुलकर बात की. प्रशांत किशोर ने स्वीकार किया कि चुनाव के नज़रिए से जन सुराज को बहुत कुछ हासिल नहीं हुआ. उनकी पार्टी को राज्य में रजिस्टर्ड क्षेत्रीय पार्टी की पहचान के लिए ज़रूरी छह फ़ीसदी वोट भी नहीं मिल सके.
PK मानते हैं कि उनकी सबसे बड़ी नाकामी यह रही कि वह ‘जंगलराज’ के डर से जेडीयू-बीजेपी और बीजेपी के डर से लालू को वोट देने की प्रक्रिया को तोड़ नहीं पाए. BBC को दिए इंटरव्यू (Prashant Kishor Interview) में उन्होंने सरकार पर तो हमला बोला ही इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष को भी निशाने पर लेते हुए अपने आगे के प्लान और दर्द के बारे में बताया.
विपक्ष की दोहरी नीति पर हमला
प्रशांत किशोर ने बिहार में विपक्ष पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जो दल ईवीएम में धांधली की बात करते हैं, वे ही उसी ईवीएम से चुनाव लड़ते जा रहे हैं, जो नहीं चल सकता. उनका कहना है कि अगर चुनाव आयोग या ईवीएम को लेकर शिकायत है, तो इस पर व्यापक जन आंदोलन करने की ज़रूरत है, न कि सिर्फ़ शिकायत करते रहने की.
‘मेरे लिए बड़ा दर्द’- Prashant Kishor
प्रशांत किशोर ने अपनी हार को ‘निजी तौर पर बड़ा झटका’ बताया, लेकिन हार नहीं मानी. उन्होंने कहा, “ये किसी परीक्षा के लिए पूरी तैयारी करके भी हार जाना है. हालांकि, उनके मन में एक बार भी राजनीति छोड़ने का विचार नहीं आया. उन्होंने वापस समाज में जाने और सरकार की जवाबदेही तय करवाने की बात कही है. प्रशांत किशोर ने कहा कि-
‘बिहार में मैंने अपना सबकुछ झोंक दिया, इसके बावजूद सफलता नहीं मिली, तो यह मेरे लिए बहुत बड़ा दर्द है.’
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नीतीश के कम होते कद पर टिप्पणी
नीतीश कुमार के राजनीतिक कद में बदलाव पर टिप्पणी करते हुए PK (Prashant Kishor) ने कहा कि इस बार मुख्यमंत्री ने अपना गृह विभाग (जो वह हमेशा अपने पास रखते थे) बीजेपी के सम्राट चौधरी को दे दिया है. इसे वह NDA के भीतर एक अहम बदलाव मानते हैं, हालांकि JDU प्रवक्ता इसे सामान्य प्रशासनिक कदम बता रहे हैं. PK का मानना है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री तो बन गए हैं, लेकिन वह ‘सीएम विदाउट पोर्टफ़ोलियो’ हो गए हैं.
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