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‘स्टालिन की खुशामद में हिंदी हुई डिलीट, दोस्ती पर पिन’: PK की पॉलिटिकल प्रायॉरिटीज पर मनीष कश्यप का तंज

मनीष कश्यप ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर, एम. के. स्टालिन जैसे नेताओं के साथ संबंध होने के बावजूद, तमिलनाडु में हिंदी भाषा के अपमान पर चुप रहे.

Prashant Kishor Hindi controversy

Prashant Kishor Hindi Controversy: राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी मुखर राय रखने वाले मनीष कश्यप ने भारत एक्सप्रेस के साथ बातचीत में राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर को लेकर कई तीखी टिप्पणियां कीं. बातचीत में जहां उन्होंने अपनी राजनीतिक समझ और सामाजिक सक्रियता पर जोर दिया, वहीं प्रशांत किशोर की रणनीतियों की सीमाओं को भी उजागर किया.

रणनीति बनाना और चुनाव जीतना– दो अलग बातें

मनीष कश्यप ने कहा कि प्रशांत किशोर भले ही एक कुशल रणनीतिकार माने जाते हों, लेकिन उनकी बनाई रणनीतियां हमेशा कारगर नहीं रही हैं.

उदाहरण देते हुए मनीष कश्यप ने कहा कि “प्रशांत किशोर ने पंजाब में कांग्रेस के लिए रणनीति बनाई, लेकिन कांग्रेस हारी. उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस के लिए काम किया, लेकिन नतीजे निराशाजनक रहे.”

सीमांचल पर चुप्पी और राष्ट्रवाद से दूरी

मनीष कश्यप ने सीमांचल क्षेत्र में अवैध घुसपैठ, डेमोग्राफिक बदलाव और हिंदी भाषा के अपमान जैसे मुद्दों पर प्रशांत किशोर की चुप्पी पर भी सवाल उठाए.

उन्होंने कहा कि “प्रशांत किशोर कभी भी सीमांचल के मुद्दे पर एक शब्द नहीं बोलते. किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया जैसे जिलों में जनसंख्या का स्वरूप बदला जा रहा है, लेकिन किशोर जी इन विषयों से दूर रहते हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि “हम जैसे लोग राष्ट्रवादी हैं, सनातनी हैं. शायद इसलिए उन्हें हम जैसे लोगों की जरूरत नहीं है.”

तमिलनाडु और हिंदी भाषा का मुद्दा

मनीष कश्यप ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर, एम. के. स्टालिन जैसे नेताओं के साथ संबंध होने के बावजूद, तमिलनाडु में हिंदी भाषा के अपमान पर चुप रहे. “उनके मित्र एम. के. स्टालिन हिंदी का अपमान करते हैं, लेकिन प्रशांत किशोर एक शब्द नहीं बोलते.”

राजनीति में कड़ी प्रतिस्पर्धा और असल चुनौतियां

बातचीत में मनीष कश्यप ने यह भी स्वीकार किया कि राजनीति में प्रवेश करना आसान नहीं है. “बड़े चेहरे जरूर टिकट पाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बहुत प्रतिस्पर्धा होती है. लोकल दावेदारों की आपसी खींचतान और जद्दोजहद से मामला उलझ जाता है.”

कैमरे, इंजीनियरिंग और बोलने की कला

मनीष कश्यप ने बताया कि कैसे उनकी इंजीनियरिंग की समझ ने उन्हें पुल-पुलिया जैसी परियोजनाओं में खामियां दिखाने में मदद की. उनके मुताबिक, कैमरे का सही इस्तेमाल और उनकी बेबाक आवाज़ ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है.


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-भारत एक्सप्रेस



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