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बालासाहेब ठाकरे को याद कर भावुक हुए राज ठाकरे, बोले- सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन साहेब का प्रभाव पीढ़ियों तक रहेगा

Raj Thackeray Balasaheb tribute: बालासाहेब ठाकरे की 100वीं जयंती पर राज ठाकरे भावुक हुए और बोले कि सत्ता अस्थायी है, लेकिन बालासाहेब की राजनीतिक और सामाजिक विरासत अमर है.

Raj Thackeray paying tribute to Balasaheb Thackeray

Raj Thackeray Balasaheb tribute: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने शिवसेना संस्थापक स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की 100वीं जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि बालासाहेब केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि मराठी अस्मिता और आत्मसम्मान की ऐसी ताकत थे, जिनका प्रभाव उनके न रहने के बाद भी महाराष्ट्र की राजनीति और समाज पर आज तक बना हुआ है.

राज ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज स्वर्गीय बालासाहेब की 100वीं जयंती है. इतिहास में अनेक जन्मशताबतें मनाई गई हैं और आगे भी मनाई जाएंगी, लेकिन यह दुर्लभ है कि कोई व्यक्ति अपने न रहने के बावजूद भी लोगों की स्मृति में बना रहे और आज भी किसी प्रांत की राजनीति और सामाजिक मामलों को प्रभावित करता रहे. ऐसा केवल बालासाहेब के मामले में ही संभव है. और इसीलिए मुझे पूर्ण विश्वास है कि बालासाहेब न केवल 100 वर्षों के बाद बल्कि अपनी द्विशताब्दी जयंती वर्ष में भी लोगों की स्मृति में बने रहेंगे.

 Raj Thackeray

बालासाहेबा का प्रभाव पीढ़ियों तक

राज ठाकरे ने कहा कि बालासाहेब को याद करने वाला मराठी व्यक्ति विभाजित, टूटा हुआ, कुचला हुआ और अन्याय को चुपचाप सहन करने वाला नहीं होगा. आज निष्ठाएं आसानी से बिक जाती हैं. सिद्धांत आसानी से त्याग दिए जाते हैं और राजनीति पूरी तरह से व्यावसायिक हो गई है. आज राजनीति में सफलता का मापन चुनावी दांव-पेच और उसमें अपनाई गई सफलता से किया जाता है, न कि इस बात से कि किन मुद्दों को प्रमुखता दी गई, क्षेत्रीय और भाषाई पहचान को कितना जीवित रखा गया.

ठाकरे ने आगे कहा कि बालासाहेब के समय में ऐसी कोई अपेक्षा नहीं थी, और अगर होती भी तो वे उसे छोड़ देते. उन्हें स्वयं सत्ता पसंद नहीं थी, लेकिन आम कार्यकर्ताओं को सत्ता के पदों पर बिठाने से उन्हें संतुष्टि मिली. सत्ता आती-जाती रहती है. आज के शासक कल शायद नाम मात्र बनकर रह जाएं, लेकिन बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो पीढ़ियों तक प्रभाव छोड़ पाते हैं. यही प्रभाव बालासाहेब की ताकत थी और यही उनकी विरासत है. बालासाहेब दूरदर्शी थे.

 Raj Thackeray with Balasaheb

मराठी मानुस का जिक्र

उनकी दूरदृष्टि आज भी प्रासंगिक है और भविष्य में भी रहेगी. इसीलिए वे अमर रहेंगे. यह उतना ही सत्य है कि बालासाहेब जैसा प्रतिभाशाली व्यक्ति हमें फिर कभी नहीं मिलेगा, जितना यह सत्य है कि बालासाहेब जैसी राजनीति कोई नहीं कर पाएगा. लेकिन यह बालासाहेब की आने वाली पीढ़ियों के हाथों में है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनकी छवि कहीं से धूमिल न हो और मराठी भाषा और मराठी लोगों के लिए उन्होंने जो संघर्ष किया, वह हमेशा प्रज्वलित रहे. और हम इसे दृढ़ता से निभाएंगे, यही हमारा मराठी लोगों से वादा है. भले ही बालासाहेब को कभी-कभी राजनीति में लचीला रुख अपनाना पड़ा हो, लेकिन मराठी लोगों के प्रति उनका प्रेम जरा भी कम नहीं हुआ, बल्कि और भी मजबूत हो गया. ये वे मूल्य हैं जो हमारे साथ हैं.


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MNS की ओर से बालासाहेब को श्रद्धांजलि

मैं (राज ठाकरे) आज एक बात दोहराता हूं कि भले ही मैं आज की पूरी तरह बदल चुकी राजनीति में थोड़ा लचीला रुख अपनाऊं, यह कभी भी मेरे व्यक्तिगत लाभ या स्वार्थ के लिए नहीं होगा. मैं उन हजारों लोगों में से एक हूं जो बालासाहेब के साथ मराठी भाषा, मराठी क्षेत्र और मराठी लोगों के प्रति उनके प्रेम को देखने आए थे. इसलिए, बालासाहेब और मराठी शब्दों के प्रति मेरा और मेरे महाराष्ट्र के सैनिकों के प्रति मेरा विश्वास और प्रेम जरा भी कम नहीं होगा. दिवंगत बालासाहेब की स्मृति महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की ओर से एक विनम्र श्रद्धांजलि है.

-भारत एक्सप्रेस



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