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Sanchar Saathi App: ‘जासूसी ऐप’ का आरोप! प्री-इंस्टॉल के आदेश से देश में उठा बवाल, सरकार ने कहा- फर्जी डर फैलाया जा रहा है

सरकार द्वारा सभी स्मार्टफोन्स में संचार साथी ऐप (Sanchar Saathi App) को प्री-इंस्टॉल करने के आदेश के बाद देशभर में विवाद तेज हो गया है. विपक्ष ने इसे “जासूसी ऐप” बताते हुए नागरिकों की निजता पर हमला कहा है, जबकि सरकार का दावा है कि यह ऐप पूरी तरह ऑप्शनल है.

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संचार साथी ऐप (Sanchar Saathi App) को लेकर 29 नवंबर को केंद्र सरकार द्वारा जारी एक आदेश के बाद आम नागरिकों की निजता को लेकर बहस छिड़ गई है. सरकार ने सभी मोबाईल कंपनियों को निर्देशित किया है कि अगले 90 दिनों में हर मोबाइल फोन में संचार साथी ऐप बेचने से पहले ही इंस्टॉल (प्री-इंस्टॉल) होना चाहिए. ऐप के फीचर्स को लेकर विपक्ष इसे सरकार का जासूसी ऐप बता रहा है, जो हर समय आम नागरिकों की निगरानी करेगा. साथ ही मोबाइल कंपनियां भी इसे लेकर चिंतित हैं, जिस पर सरकार ने अपनी स्पष्ट भूमिका रखते हुए बयान जारी किया है.

संचार साथी ऐप को लेकर सरकार का निर्देश

भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications) ने 28 नवंबर को एर दिशा-निर्देश जारी किया था. इसके मुताबिक, सभी मोबाइल कंपनियों के स्मार्टफोन्स में संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल करके बेचे जाएंगे. एप्पल (Apple), सैमसंग ( Samsung), मोटोरोला (Motorola), श्याओमी(Xiaomi), वीवो (Vivo) और ओप्पो (Oppo) जैसी स्मार्टफोन कंपनियों को आदेश दिया गया था कि वे संचार साथी मोबाइल ऐप को पहले से इंस्टॉल करके अपने फोन बेचें. ऐसा न करने पर इन कंपनियों पर जुर्माना लगेगा. कंपनियों से 90 दिनों में आदेश लागू करने और 120 दिनों में DoT को कंप्लायंस रिपोर्ट देने को कहा गया था.

इसके बाद तमाम जगहों से इस फैसले के खिलाफ विरोध के स्वर उठने लगे थे. एक रिपोर्ट के अनुसार टेक एक्सपर्ट्स इस आदेश को लेकर चिंतित थे कि संचार साथी ऐप किस काम आएगा, डेटा कहां रखा जाएगा और क्या यूजर इसे हटा सकेंगे?

विपक्ष ने उठाया मुद्दा

संचार साथी ऐप को विपक्ष ने निगरानी का साधन बताया है, जिससे सरकार हर एक यूजर पर नजर रख पाएगी. इसी कड़ी में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी एप को लेकर कड़ा विरोध जताया. प्रियंका गांधी ने कहा कि यह “जासूसी ऐप” है. उन्होंने आगे कहा कि यह कदम नागरिकों की निजता पर सीधा हमला है. हर नागरिक का निजता का अधिकार सर्वोपरि है. प्रियंका गांधी ने कहा,

साइबर सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सरकार हर नागरिक के फोन में झांकने का बहाना बनाए. मुझे नहीं लगता कि कोई भी नागरिक इससे खुश होगा.

शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे निगरानी के लिए बनया गया ऐप बताया है. उन्होंने कहा, “प्री-इंस्टॉल्ड ऐप के नाम पर यह निगरानी का एक और तरीका है. इससे हमारी हर फोन गतिविधि ट्रैक की जा सकती है. हम इसका कड़ा विरोध करेंगे और सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग करेंगे”

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सरकार ने दी सफाई

दूरसंचार विभाग के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि विपक्ष संचार साथी ऐप को लेकर लोगों को भ्रमित कर रहा है. यह पूरी तरह ऑप्शनल है. यह यूजर पर निर्भर है कि वह इस ऐप को अपने मोबाइल में रखना चाहता है या नहीं. यूजर अपने फोन से संचार साथी ऐप हटा भी सकता है.

-भारत एक्सप्रेस



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