पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल युद्ध और ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत ने न केवल वैश्विक कूटनीति, बल्कि भारत की आंतरिक राजनीति में भी एक बड़ा उबाल ला दिया है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (सपा) के प्रमुख शरद पवार ने पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसने इतिहास और वर्तमान के रिश्तों को एक नई बहस के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है. पवार का सीधा सवाल है कि क्या अयातुल्ला अली खामेनेई का पंडित नेहरू का प्रशंसक होना पीएम मोदी की नाराजगी की वजह है?
‘वर्ल्ड लीडर हैं तो युद्ध रुकवाएं पीएम मोदी’
शरद पवार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी खुद को एक ‘विश्व गुरु’ और वर्ल्ड लीडर के रूप में पेश करते हैं, तो उन्हें अपनी इस साख का इस्तेमाल ईरान-इजरायल युद्ध को रोकने के लिए करना चाहिए. पवार ने तंज कसते हुए कहा कि मोदी जी को अपने दोस्तों (इजरायल और अमेरिका) से कहना चाहिए कि यह कत्लेआम रोकें. पूरी दुनिया खामेनेई का सम्मान करती थी, सिवाय इजरायल के. वह भारत के एक सच्चे दोस्त थे जिन्होंने हर मुश्किल वक्त में हमारा साथ दिया.
नेहरू कनेक्शन पर उठाया सवाल
शरद पवार ने इस पूरे घटनाक्रम को ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए एक गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के विचारों के बड़े अनुयायी (फॉलोवर) थे. पवार ने पूछा कि क्या इसी बात पर मोदी जी को गुस्सा आ रहा है? क्या नेहरू प्रेम की वजह से ही भारत सरकार एक इतने बड़े वैश्विक नेता की हत्या पर शोक व्यक्त करने से कतरा रही है?
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पवार ने आगे सवाल उठाया कि भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री आखिर किससे डर रहे हैं? क्या यह डर इजरायल का है या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का? उन्होंने कहा कि जब एक मित्र देश के शीर्ष नेता की इस तरह हत्या होती है, तो भारत जैसे देश के प्रमुखों को नैतिकता के नाते दुख जताना चाहिए था.
कूटनीतिक संतुलन की चुनौती
वर्तमान परिदृश्य में भारत सरकार एक अत्यंत कठिन ‘डिप्लोमैटिक टाइटरोप वॉक’ कर रही है. एक तरफ भारत के इजरायल के साथ गहरे रणनीतिक और रक्षा संबंध हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान के साथ भारत के ऊर्जा हित और चाबहार बंदरगाह जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट जुड़े हैं. हाल ही में पीएम मोदी द्वारा बुलाई गई सीसीएस (CCS) की बैठक में भारत ने ‘संवाद और कूटनीति’ की बात तो की, लेकिन खामेनेई की मौत पर कोई आधिकारिक शोक संदेश जारी न करना विपक्ष के निशाने पर आ गया है.
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