रिपोर्ट- आनंद बिहारी सिंह
Sitamarhi Mukhiya bribe case Nal Jal Yojana: बिहार के सीतामढ़ी में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक ऐसी कार्रवाई हुई है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है. कोर्ट परिसर के ठीक बाहर जहां इंसाफ की उम्मीद की जाती है, वहीं निगरानी विभाग की टीम ने एक घूसखोर मुखिया को रंगे हाथ दबोच लिया. यह मुखिया साहब किसी बड़े घोटाले में नहीं बल्कि सरकार की ‘नल-जल योजना’ के तहत मिलने वाले एक गरीब कर्मचारी के मानदेय (सैलरी) को पास करने के बदले 16 हजार रुपये की रिश्वत डकार रहे थे. जैसे ही नोटों की गड्डी मुखिया के हाथ में आई, सादे लिबास में तैनात निगरानी की टीम ने उन्हें दबोच लिया. इसके बाद कोर्ट परिसर के बाहर अफरा-तफरी मच गई और लोग समझ ही नहीं पाए कि आखिर माजरा क्या है.
जानिए क्या है पूरा मामला?
यह पूरी कहानी भ्रष्टाचार और एक वार्ड सदस्य की बेबसी से जुड़ी है. दरअसल, पीड़ित अजय कुमार पासवान एक पंप संचालक और वार्ड सदस्य हैं. सरकार के नियम के मुताबिक, नल-जल योजना के तहत पंप संचालन के लिए उन्हें हर महीने 2,000 रुपये का भुगतान किया जाना था. लेकिन आरोप है कि इलाके के मुखिया ने अजय समेत कई दूसरे वार्ड सदस्यों का करीब दो साल का भुगतान रोक रखा था.
अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए अजय महीनों से मुखिया के चक्कर काट रहे थे. लेकिन मुखिया जी का दिल नहीं पसीजा. उन्होंने साफ कह दिया कि अगर रुका हुआ पैसा चाहिए, तो बदले में 16,000 रुपये का ‘नजराना’ यानी रिश्वत देनी होगी. यानी एक तरफ तो गरीब का हक मारा जा रहा था और दूसरी तरफ उसी हक को देने के बदले मोटी रकम मांगी जा रही थी.
DM से गुहार लगाई पर नहीं हुई सुनवाई
हैरानी की बात यह है कि पीड़ित अजय कुमार पासवान ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ हार नहीं मानी. उन्होंने सबसे पहले सीतामढ़ी के जिलाधिकारी (DM) और पंचायती राज पदाधिकारी से लिखित शिकायत की. उन्हें उम्मीद थी कि बड़े अफसर उनकी मदद करेंगे, लेकिन सिस्टम की सुस्ती देखिए कि किसी ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. जब सरकारी दफ्तरों से न्याय नहीं मिला, तब अजय ने पटना स्थित निगरानी विभाग का दरवाजा खटखटाया.
कोर्ट परिसर के बाहर दबोचे गए मुखिया जी
तय योजना के मुताबिक, अजय कुमार पासवान रिश्वत की रकम लेकर पहुंचे. जैसे ही उन्होंने कोर्ट परिसर के बाहर मुखिया को 16,000 रुपये थमाए, निगरानी की टीम जो पहले से ही वहां मुस्तैद थी, बिजली की रफ्तार से आगे बढ़ी और मुखिया को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद मुखिया के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं. कोर्ट जैसी जगह पर इस तरह की कार्रवाई देख वहां मौजूद लोग भी दंग रह गए.
फिलहाल, निगरानी विभाग की टीम आरोपी मुखिया को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है. यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि अगर आम आदमी ठान ले और सही जगह शिकायत करे, तो भ्रष्ट अधिकारियों और प्रतिनिधियों की खैर नहीं. अब देखना यह है कि जांच में और कितने सफेदपोशों के नाम सामने आते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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