Uttarakhand Ekal Mahila Yojana: उत्तराखंड राज्य में एकल महिलाएं स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की ओर से प्रयास जारी है, उत्तराखंड सरकार महिलाओं के लिए मंगलवार को एक योजना लांच कर रही है. इस योजना के तहत सरकार की ओर से इसके लिए महिलाओं को परियोजना लागत पर 75 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 10 फरवरी को देहरादून से योजना का शुभारंभ करेंगे. चलिए जानते है क्या है पूरा मामला:
योजना का उद्देश्य,आत्मनिर्भरता पर जोर
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य एकल महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है. सरकार परियोजना लागत पर 50 से 75 प्रतिशत तक अनुदान देगी, जिससे महिलाएं बिना आर्थिक दबाव के अपना काम शुरू कर सकें. सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश की एकल महिलाएं आत्मविश्वास के साथ अपने पैरों पर खड़ी हों और समाज की मुख्यधारा में मजबूत भूमिका निभाएं.
पहले चरण में 484 महिलाएं
वहीं, सरकार का मानना है कि यह योजना सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि एकल महिलाओं को सम्मानजनक जीवन और आत्मविश्वास देने की पहल है. आने वाले समय में योजना का दायरा और बढ़ाया जाएगा. सरकार का मकसद उन महिलाओं को आर्थिक संबल देना है जो किसी कारणवश अकेले जीवन यापन कर रही हैं और रोजगार के अवसरों से वंचित हैं. योजना के शुरुआती चरण में प्रदेश के कई जिलों की 484 एकल महिलाओं को इसका लाभ दिया जाएगा.
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, पहले चरण में करीब 2 हजार महिलाओं को योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन विभिन्न जिलों से प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद फिलहाल 484 महिलाओं का चयन किया गया है.
किन महिलाओं को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना के तहत राज्य की अविवाहित, तलाकशुदा, निराश्रित, विधवा, परित्यक्ता, ट्रांसजेंडर, एसिड पीड़ित और अपराध पीड़ित महिलाओं को इसका लाभ दिया जाएगा. आवेदक महिला की आयु 21 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए. इसके साथ ही वार्षिक आय 72 हजार रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए. इस योजना के तहत महिलाएं छोटे उद्योग, स्वरोजगार, कृषि आधारित कार्य, पशुपालन, हस्तशिल्प, दुकान, सेवा क्षेत्र जैसे कई कार्य शुरू कर सकेंगी. सरकार परियोजना लागत का 50 से 75 प्रतिशत तक अनुदान देगी, जिससे महिलाओं पर आर्थिक बोझ कम होगा.
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महिलाएं सम्मानित जीवन जी सकेंगी
वहीं, उत्तराखंड सरकार का मानना है कि इस योजना से एकल महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और वे सम्मानजनक जीवन जी सकेंगी. स्वरोजगार के जरिए महिलाएं खुद के पैरों पर खड़ी होकर समाज में सशक्त भूमिका निभा सकेंगी.
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