Super El Niño 2026: प्रशांत महासागर में बढ़ता तापमान ‘सुपर अलनीनो’ (Super El Nino) को जन्म दे रहा है, जो मई 2026 से फरवरी 2027 तक पूरी दुनिया में मौसम का चक्र बिगाड़ सकता है. मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह 1870 के दशक के बाद का सबसे विनाशकारी अलनीनो साबित हो सकता है.
सुपर अलनीनो के सक्रिय होने से भारत में मानसूनी बारिश औसत से 92% कम रहने का अनुमान है, जो कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा संकट है. अक्टूबर से फरवरी के बीच इसकी तीव्रता चरम पर होगी, जिससे वैश्विक तापमान के पुराने सभी रिकॉर्ड टूटने की आशंका है. जलवायु विशेषज्ञ इसे 21वीं सदी की सबसे बड़ी ‘क्लाइमेट इमरजेंसी’ (Climate Emergency) मान रहे हैं.
रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और सूखा
NOAA के अनुसार, समुद्र की सतह का तापमान 2°C तक बढ़ सकता है, जिसे ‘राक्षस अलनीनो’ (Demon El Nino) कहा जा रहा है. भारत में मानसून जल्दी आने के बावजूद इसके कमजोर रहने की 35% संभावना है, जिससे खेती और जल आपूर्ति पर बुरा असर पड़ेगा.
वैश्विक तबाही की आशंका
इतिहास गवाह है कि शक्तिशाली अलनीनो ने पूर्व में करोड़ों लोगों की जान ली है. यदि यह वर्तमान पूर्वानुमान (Current forecast) के अनुसार विकसित होता है, तो साल 2027 अब तक का सबसे गर्म साल बन सकता है, जिससे कहीं बाढ़ तो कहीं भीषण सूखे की स्थिति पैदा होगी (Flood and Severe drought).
सुपर अलनीनो कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा संकट
सुपर अलनीनो के सक्रिय होने से भारत में मानसूनी बारिश औसत से 92% कम रहने का अनुमान है, जो कृषि क्षेत्र के लिए बड़ा संकट है. अक्टूबर से फरवरी के बीच इसकी तीव्रता चरम पर होगी, जिससे वैश्विक तापमान (Global temperature) के पुराने सभी रिकॉर्ड टूटने की आशंका है. जलवायु विशेषज्ञ इसे 21वीं सदी की सबसे बड़ी ‘क्लाइमेट इमरजेंसी’ मान रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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