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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, माघ मेले में कथित पिटाई मामले में सुनवाई से इंकार

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से कथित मारपीट पर दायर जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इंकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि कानून व्यवस्था राज्य सरकार का विषय है और याचिकाकर्ता संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें..

Magh Mela Avimukteshwaranand PIL Supreme Court: प्रयागराज के संगम तट पर आयोजित माघ मेले में मौनी अमावस्या के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका सुनने से ही इंकार कर दिया. कोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है. साथ ही याचिकाकर्ता को सलाह दी गई कि वे संबंधित अधिकारी को ज्ञापन दे सकते हैं. बताते चलें याचिका में मेला प्रशासन की तरफ से अविमुक्तेश्वरानंद को भेजे गए नोटिस को भी गलत बताया गया था.

याचिका में क्या-क्या आरोप लगाए गए?

दरअसल याचिका सुप्रीम कोर्ट(SC) के वकील उज्ज्वल गौड़ ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की थी. इसमें धार्मिक गुरुओं पर की गई पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए थे. याचिकाकर्ता ने कहा कि मेला क्षेत्र में मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) नहीं होने और पुलिस को मिली बेलगाम विवेकाधीन शक्तियों के कारण यह घटना हुई. याचिका में यह भी कहा गया कि पुलिस ने बटुकों को बेरहमी से पीटा और शंकराचार्य को अपमानित किया. याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि इस मामले की जांच हो और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए.

माघ मेले में क्या हुआ था?

मौनी अमावस्या के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने बटुकों के साथ शाही स्नान करने पालकी पर सवार होकर जा रहे थे. तभी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें पालकी आगे न ले जाने को कहा. जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई. पुलिस ने लाख समझाने की कोशिश की, लेकिन न शंकराचार्य माने और न ही उनके शिष्य. जबरदस्ती करने लगे तो पुलिस ने एहतियात के तौर पर बटुकों को रास्ते से हटाना शुरू कर दिया. शंकराचार्य ने बटुकों को पीटने का गंभीर आरोप लगाया. यहां तक कि वे धरने पर भी बैठ गए और कुछ दिनों बाद माघ मेला छोड़कर चले गए.

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कोर्ट ने क्यों सुनी नहीं याचिका?

सुप्रीम कोर्ट(SC) ने याचिका को सुनने से इंकार करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था राज्य का विषय है. केंद्र सरकार या सुप्रीम कोर्ट का इसमें सीधा हस्तक्षेप नहीं हो सकता. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को राज्य सरकार के संबंधित अधिकारी को ज्ञापन देने की सलाह दी. यह फैसला बता रहा है कि धार्मिक आयोजनों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट सीधे दखल नहीं देगा. अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों ने इस फैसले पर निराशा जताई है और कहा है कि वे राज्य स्तर पर कार्रवाई की मांग जारी रखेंगे.

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-भारत एक्सप्रेस



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