Swami Avimukteshwaranand Bee Attack: अपनी बेबाक बयानबाजी और हालिया विवादों के कारण सुर्खियों में रहने वाले ज्योतिष्पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की सभा में बुधवार को उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब मधुमक्खियों के एक झुंड ने अचानक हमला बोल दिया.
दरअसल वाराणसी के रोहनिया में आयोजित इस सभा में मधुमक्खियों के आतंक से ऐसा माहौल बना कि श्रद्धालुओं को अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागना पड़ा. हालात बिगड़ते देख कार्यक्रम को समय से पहले ही समाप्त करना पड़ा, लेकिन जाते-जाते शंकराचार्य ने इस ‘अटैक’ के पीछे विरोधियों की साजिश की ओर इशारा कर दिया.
बड़ी खबर-
शंकराचार्य के काशी में प्रवचन के दौरान मधुमक्खी का हमला।
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी के मुताबिक़ इस दौरान किसी ने छत्ते में ढेला मारा।
40 से अधिक लोग प्रभावित।
बड़ी बात ये रही कि इस दौरान शंकराचार्य अविचलित रहे।
मधुमक्खियाँ उन्हें छू तक न सकीं।
एक वास्तविक संत की… pic.twitter.com/dyTa700Xyx
— abhishek upadhyay (@upadhyayabhii) May 14, 2026
‘मूरत की तरह बैठे रहें'(Swami Avimukteshwaranand Bee Attack)
जैसे ही मधुमक्खियों ने श्रद्धालुओं को निशाना बनाना शुरू किया, कार्यक्रम स्थल पर भगदड़ मच गई. इस बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने माइक संभाला और लोगों से शांत रहने की अपील की. उन्होंने आध्यात्मिक अंदाज में कहा कि कुछ लोगों को अच्छी चीजें रास नहीं आतीं, इसलिए किसी ने छत्ते को कुरेद दिया होगा. आप लोग पत्थर की मूरत की तरह बैठे रहें, ये कुछ नहीं करेंगी. हालांकि, मधुमक्खियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों की ओर भागना ही पड़ा.
‘अच्छी चीज रास नहीं आई होगी’
सभा के बीच हुए इस हमले को शंकराचार्य ने महज एक इत्तेफाक नहीं माना. उन्होंने मंच से कहा कि किसी ने जानबूझकर छत्ते को छेड़ा है क्योंकि उन्हें यह धर्मसभा पसंद नहीं आ रही थी. उनके इस बयान ने एक बार फिर उनके समर्थकों के बीच ‘साजिश’ वाली चर्चा को हवा दे दी है.
फिलहाल, बवाना थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि क्या वाकई किसी शरारती तत्व ने मधुमक्खियों के छत्ते को पत्थर मारा था या यह एक प्राकृतिक दुर्घटना थी.
क्या था सभा का मुख्य एजेंडा?
शंकराचार्य इन दिनों ‘गविष्ठी गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा’ पर हैं. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गौवंश संरक्षण और गौमाता को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करवाना है. रोहनिया की सभा में उन्होंने स्पष्ट कहा कि सनातन धर्म में गाय केवल एक पशु नहीं बल्कि पूरी संस्कृति और अर्थव्यवस्था की आधारशिला है.
घटना (Swami Avimukteshwaranand Bee Attack) के बाद उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि गौमाता की रक्षा के लिए अगर पाकिस्तान में भी प्रयास करना पड़े, तो वहां भी उन्हें राष्ट्रमाता घोषित करवाने की कोशिश होनी चाहिए.
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विवादों से गहरा नाता
अविमुक्तेश्वरानंद का नाम पिछले कुछ महीनों में कई बड़े विवादों से जुड़ा रहा है. हाल ही में उन पर बटुकों के शोषण के गंभीर आरोप लगे, जिसकी वजह से वे विपक्षी खेमे के निशाने पर रहे. इसके अलावा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ उनकी तीखी बयानबाजी और राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के समय उठाए गए उनके सवालों ने उन्हें नेशनल मीडिया की हेडलाइंस में बनाए रखा. यही वजह है कि उनकी सभा में मधुमक्खियों के हमले को भी सोशल मीडिया पर कई तरह के राजनीतिक चश्मों से देखा जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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