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धर्मांतरण, यौन शोषण और जबरन मांस खिलाने के आरोप तक…नासिक TCS पर क्यों लगा ‘कॉरपोरेट जिहाद’ का काला दाग?

TCS नासिक ऑफिस में महिला कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के गंभीर आरोप लगाए. पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर SIT गठित की, मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया…

TCS Nashik harassment case: देश की प्रतिष्ठित आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नासिक स्थित ऑफिस से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां कई महिला कर्मचारियों ने अपने ही टीम लीडरों और वरिष्ठ सहकर्मियों पर यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण के प्रयास और ‘ब्रेनवॉश’ करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें टीम लीडर और इंजीनियर्स शामिल हैं.

क्या हैं मुख्य आरोप?

पीड़ित महिलाओं (उम्र 18-25 वर्ष) ने पुलिस को दी शिकायतों में रोंगटे खड़े कर देने वाले दावे किए हैं:

शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना: कार्यस्थल पर छेड़छाड़, दुष्कर्म और भद्दे कमेंट्स करने के आरोप.

धार्मिक दबाव: जबरन धर्मांतरण के लिए ‘ब्रेनवॉश’ करना और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना.

मांसाहार के लिए मजबूर करना: एक पुरुष कर्मचारी ने भी आरोप लगाया है कि उसे विशेष धार्मिक क्रियाएं करने और जबरन मांस खिलाने के लिए प्रताड़ित किया गया.

बदसुलूकी: पहनावे और शारीरिक बनावट पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करना.

पुलिस की अब तक की कार्रवाई

नासिक पुलिस ने इस मामले ( TCS Nashik) को प्राथमिकता पर लेते हुए अब तक कुल 9 FIR (8 मुंबई नाका और 1 देवळाली थाने में) दर्ज की हैं.

गिरफ्तार आरोपी: आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तार और अश्विन चैनानी को हिरासत में लिया गया है.

विशेष जांच दल: मामले की गहराई से जांच के लिए एसीपी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में 12 सदस्यीय SIT बनाई गई है.

घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस घटना (TCS Nashik harassment case) ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. जहां भाजपा नेताओं ने इसे ‘कॉरपोरेट जिहाद’ करार देते हुए आईटी सेक्टर में सुरक्षा ऑडिट की मांग की है, वहीं विपक्षी नेताओं ने कंपनी के इंटरनल कंप्लेंट सिस्टम पर सवाल उठाए हैं. सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब महिलाएं पहले शिकायत कर रही थीं, तब कंपनी प्रबंधन ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?

कंपनी का क्या है रुख?

TCS ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि वे किसी भी तरह के उत्पीड़न के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति रखते हैं. कंपनी ने आरोपियों को जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया है और पुलिस प्रशासन को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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