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दिल्ली का रक्तरंजित इतिहास: 1985 ट्रांजिस्टर बम से 2008 सीरियल ब्लास्ट तक, 5 बड़ी घटनाओं में 150+ मौतें

Terror Tragic In Delhi Timeline: दिल्ली के लाल किले के पास हुई हालिया धमाके की घटना (Red Fort Blast) ने उस रक्तरंजित इतिहास की याद दिलाती है, जब शहर को दशकों से बड़े आतंकी हमलों का सामना करना पड़ा है.

Terror Tragic In Delhi Timeline From 1985 Transistor Bombs to Red Fort

1985 ट्रांजिस्टर बम से 2008 सीरियल ब्लास्ट तक

Terror Tragic In Delhi Timeline: लाल किले के पास हुए धमाके (Red Fort Blast) ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के प्रति चिंता बढ़ा दी है. यह घटना हमें दिल्ली के उस रक्तरंजित इतिहास की याद दिलाती है, जब शहर को 1985 के ट्रांजिस्टर बम धमाकों से लेकर 2008 के सीरियल ब्लास्ट तक कई बड़े आतंकी हमलों का सामना करना पड़ा था. चाहे वह 1996 में लाजपत नगर के व्यस्त बाज़ार में हुआ विस्फोट हो, या 2005 में दिवाली से पहले सरोजिनी नगर में हुआ नरसंहार. ये सभी घटनाएं दिखाती हैं कि दिल्ली हमेशा से ही आतंकवादियों के निशाने पर रही है.

लाल किले के पास हुए धमाके (Red Fort Blast) से पहले इन हमलों का उद्देश्य देश की लोकतांत्रिक भावना को आहत करना और आम जनता के बीच दहशत फैलाना रहा है. लाल किले के पास आज की घटना इस बात का दुखद प्रमाण है कि इन खतरों से निपटना आज भी एक सतत चुनौती बना हुआ है. आइये जानें अब तक हिल्ली में हुए धमाकों की घटनाओं के बारे में…

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दिल्ली में अब तक हुई घटनाएं
साल घटना स्थान हताहतों की संख्या जिम्मेदार संगठन
1985 ट्रांजिस्टर बम धमाके विभिन्न सार्वजनिक स्थान 49 खालिस्तानी चरमपंथी
1996 लाजपत नगर ब्लास्ट लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट 13 JKIF
2000 लाल किला हमला लाल किला 3 LeT
2001 संसद पर हमला भारतीय संसद भवन 9 JeM-LeT
2005 दिल्ली सीरियल ब्लास्ट सरोजिनी नगर, पहाड़गंज, गोविंदपुरी बस 62 LeT
2008 दिल्ली सीरियल ब्लास्ट कनॉट प्लेस, गफ्फार मार्केट, ग्रेटर कैलाश-I 30 IM

1985: ट्रांजिस्टर बम धमाके

मई 1985 में, दिल्ली में एक समन्वित आतंकी हमले के तहत कई बम विस्फोट हुए. आतंकवादियों ने ट्रांजिस्टर रेडियो सेटों में बम छिपाकर रखे थे और उन्हें सार्वजनिक स्थानों, जैसे बस स्टैंड और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर छोड़ दिया गया था. इन हमलों में अकेले दिल्ली में 49 लोग मारे गए और 127 से अधिक घायल हुए थे. इन हमलों के पीछे खालिस्तानी चरमपंथियों का हाथ माना जाता था, जिसका उद्देश्य लोगों के बीच दहशत फैलाना था.

1996: लाजपत नगर ब्लास्ट

21 मई 1996 को, दिल्ली के एक प्रमुख बाज़ार लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट में शाम के समय एक शक्तिशाली बम विस्फोट हुआ. इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई और 39 लोग घायल हुए. इस आतंकी घटना की जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर इस्लामिक फ्रंट ने ली थी, जिसने यह दर्शाया कि कश्मीर केंद्रित आतंकवादी समूहों का प्रभाव दिल्ली तक पहुँच चुका था.

2001: भारतीय संसद पर हमला

13 दिसंबर 2001 को, पाँच बंदूकधारियों (आतंकवादियों) ने भारतीय लोकतंत्र के प्रतीक संसद भवन पर हमला कर दिया. संसद परिसर में आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच भीषण गोलीबारी हुई. इस हमले में दिल्ली पुलिस के छह जवान, दो संसद सुरक्षा सेवा के कर्मचारी और एक माली शहीद हुए. सभी पाँच हमलावर भी मारे गए. इस हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों का हाथ था, जिसने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को चरम पर पहुँचा दिया था.

2005: दिवाली से पहले सीरियल ब्लास्ट

29 अक्टूबर 2005 को, दीवाली से ठीक दो दिन पहले धनतेरस की शाम को, दिल्ली के तीन भीड़-भाड़ वाले स्थानों—सरोजिनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी (एक डीटीसी बस में)—में सिलसिलेवार बम धमाके हुए. इन हमलों में 62 से अधिक लोगों की जान गई और 200 से ज़्यादा लोग घायल हुए. त्योहार के माहौल में हुए इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था. जाँच में इन हमलों के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का हाथ सामने आया था.

2008: दिल्ली सीरियल ब्लास्ट

13 सितंबर 2008 की शाम को, लगभग 30 मिनट के अंतराल में, राष्ट्रीय राजधानी के कई प्रमुख स्थानों—कनॉट प्लेस, गफ्फार मार्केट (करोल बाग) और ग्रेटर कैलाश-I के बाज़ार—में पाँच बम धमाके हुए. इन विस्फोटों में 20 से 30 लोगों की मौत हुई और 100 से अधिक लोग घायल हुए. इन हमलों की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन (IM) नामक आतंकी गुट ने ली थी. इन हमलों के बाद, सुरक्षा एजेंसियों ने कई जगहों से जिंदा बमों को भी निष्क्रिय किया था.

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एक नया दुखद अध्याय

आज की घटना (Red Fort Blast) दिल्ली के आतंकी इतिहास में एक नया, दुखद अध्याय जोड़ती है. हालांकि देश की सुरक्षा एजेंसियां दशकों से इन खतरों का सफलतापूर्वक सामना कर रही हैं, लेकिन लाल किले के पास हुआ यह विस्फोट स्पष्ट करता है कि आतंकी तत्त्व अभी भी सक्रिय हैं और संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाने की ताक में हैं. इस घटना की गहन जांच रही है. सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत किया जा रहा है. ऐसे समय में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि देश की राजधानी की अटल भावना और सामुदायिक सद्भाव को खंडित न कर सके.



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