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बीते 11 वर्षों में देश की साक्षरता दर में तेज गति से हुई वृद्धि, बढ़कर हुई 80.9 प्रतिशत, हिमाचल बना पूर्ण साक्षर राज्य

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत की साक्षरता दर 2011 की 74 प्रतिशत से बढ़कर 2023–24 में 80.9 प्रतिशत हो गई है.

India Literacy Rate: देश भर में साक्षरता की दर तेजी से बढ़ रही है. खास तौर पर बीते 11 वर्षों में देश की साक्षरता दर में तेज गति से वृद्धि दर्ज की गई है. यानी देश में साक्षर एवं पढ़े-लिखे व्यक्तियों की संख्या में इजाफा हुआ है और अधिक छात्र शिक्षा ले रहे हैं. सोमवार को यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने साझा की.

इसके साथ ही शिक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि हिमाचल प्रदेश ने पूर्ण साक्षरता की उपलब्धि हासिल कर ली है. हिमाचल प्रदेश पूर्ण साक्षरता हासिल करने वाला देश का पांचवां राज्य है. शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक हिमाचल प्रदेश ने पूर्ण कार्यात्मक साक्षरता हासिल कर ली है. इसके साथ ही वह त्रिपुरा, मिजोरम, गोवा और केंद्र शासित क्षेत्र लद्दाख के बाद पांचवां पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है.

बता दें कि लद्दाख जून 2024 में पहला पूर्ण साक्षर केंद्रशासित क्षेत्र घोषित हुआ था. सोमवार को शिक्षा मंत्रालय ने नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025 का आयोजन किया. इस मौके पर यह जानकारी दी गई. कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गरिमा, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का माध्यम है. उन्होंने बताया कि भारत की साक्षरता दर 2011 की 74 प्रतिशत से बढ़कर 2023–24 में 80.9 प्रतिशत हो गई है.

अभियान से जुड़े 3 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी

गौरतलब है कि 1 से 8 सितंबर तक उल्लास साक्षरता सप्ताह 2025 आयोजित किया गया, जिसके तहत देशव्यापी पंजीकरण अभियान चलाया गया. केंद्रीय रक्षा मंत्री ने इस संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि ‘उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ से 3 करोड़ से अधिक शिक्षार्थी और 42 लाख स्वयंसेवक जुड़े हैं.

इनमें से 1.83 करोड़ शिक्षार्थियों ने आकलन परीक्षा दी, जिसमें 90 प्रतिशत को सफलता मिली. उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे भी इस साक्षरता आंदोलन में जुड़ें और इसे शैक्षणिक क्रेडिट से जोड़ा जाए. वहीं शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों ने साक्षरता हासिल कर एक मिसाल कायम की है. उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के जरिए शिक्षा और समावेशन को तेज गति दी है.

साक्षरता की नई परिभाषा में डिजिटल साक्षरता, वित्तीय जागरूकता और नागरिक अधिकारों की समझ को शामिल किया जा रहा है. उन्होंने तीन प्राथमिकताएं रेखांकित कीं: पहली स्वयंसेवा की भावना को बनाए रखना, दूसरी साक्षरता को कौशल और आजीविका से जोड़ना व तीसरी साक्षरता की परिभाषा का निरंतर विस्तार करना. यहां लद्दाख और गोवा के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव भी साझा किए.


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-भारत एक्सप्रेस



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