Treadmill Invented for Punishment: जिम में खुद को फिट रखने और कैलोरी बर्न करने के लिए ट्रेडमिल आज हर किसी की पहली पसंद है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मशीन का इतिहास खून-पसीने और बेरहमी से भरा है? साल 1818 में जब इसका आविष्कार हुआ, तब इसका मकसद सेहत सुधारना नहीं, बल्कि इंसानों को घुटने टेकने पर मजबूर करना था.
दरअसल, आज के दौर में जिम की शान कही जाने वाली ट्रेडमिल का शुरुआती मकसद फिटनेस या सेहत बनाना बिल्कुल नहीं था. इसका आविष्कार आज से करीब दो सदी पहले, साल 1818 में ब्रिटेन के एक जाने-माने इंजीनियर विलियम क्यूबिट ने किया था. उन्होंने इस मशीन को ‘ट्रेडवील’ (Treadmill) नाम दिया था और इसे बनाने के पीछे का असली मकसद जेल के कैदियों को एक बेहद कड़ा सबक सिखाना, उनसे कड़ी मेहनत करवाना और उन्हें अनुशासित करना था.
कभी न खत्म होने वाली जानलेवा सीढ़ियां
यह पुरानी ‘ट्रेडवील’ आज के आधुनिक और आरामदायक ट्रेडमिल जैसी बिल्कुल नहीं थी. यह एक विशाल, घूमते हुए लकड़ी के बेलन या पहिए की तरह थी, जिस पर कैदियों को सीधे खड़े होकर लगातार कदम बढ़ाने पड़ते थे. इस पर चलते हुए ऐसा महसूस होता था मानो कोई इंसान कभी न खत्म होने वाली सीढ़ियां चढ़ रहा हो (fitness machine history).
इस मशीन पर जरा सा भी सुस्ताना या रुकना मौत को दावत देने जैसा था, क्योंकि रफ्तार धीमी होते ही पैर फिसलने और नीचे गिरकर कुचले जाने का खतरा हमेशा बना रहता था.
पसीने से अनाज पीसने का काम
कैदियों से इस मशीन पर जो बेइंतहा मेहनत कराई जाती थी, उससे पैदा होने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल जेल प्रशासन अपने फायदे के लिए करता था. कैदियों के लगातार चलने से जो ताकत पैदा होती थी, उससे बड़ी-बड़ी चक्कियों में अनाज पीसा जाता था और पानी के पंप चलाए जाते थे. हालांकि, कई जेलों में इसका कोई व्यावहारिक इस्तेमाल नहीं होता था; वहां इसका एकमात्र उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ कैदियों को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ना और तड़पाना था.
रोज 8 घंटे का भयानक टॉर्चर और पाबंदी
जेल में बंद कैदियों के लिए यह मशीन किसी नरक से कम नहीं थी. उन्हें रोज लगातार 6 से 8 घंटे तक इस घूमते पहिए पर कदमताल करनी पड़ती थी, जिससे वे पूरी तरह अधमरे हो जाते थे. इस अमानवीय और क्रूर प्रथा के कारण कई कैदी गंभीर रूप से बीमार और अपाहिज होने लगे.
आखिरकार, 19वीं सदी के अंत तक इस मशीन की भयावहता और क्रूरता को देखते हुए इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया. यही टॉर्चर मशीन समय के साथ बदलते-बदलते आज हमारे घरों और जिम का सबसे पसंदीदा फिटनेस टूल बन चुकी है (dark history of treadmill).
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-भारत एक्सप्रेस
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