Ujjain Mahakal Donation Record: भगवान श्री महाकालेश्वर के दरबार में आस्था का सैलाब तो सदियों से उमड़ता रहा है, लेकिन ‘श्री महाकाल लोक’ के भव्य स्वरूप ने इस प्रवाह को एक महासागर में बदल दिया है. भक्तगण न केवल शीश नवाते हैं, बल्कि बाबा के चरणों में अपनी श्रद्धा को स्वर्ण, रजत और नकद रूप में भी अर्पित करते हैं. वैसे तो मंदिर समिति हर साल आय-व्यय का ब्यौरा देती है, लेकिन इस बार जो तस्वीर सामने आई है, वह बाबा महाकाल की अगाध संपत्ति और बढ़ते वैभव की गाथा है.
यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों की अटूट आस्था का प्रतिबिंब है, जिसने महाकाल के खजाने को कुबेर के भंडार जैसा समृद्ध बना दिया है. आइए, विस्तार से जानते हैं बाबा महाकाल की इस वित्तीय और स्थायी संपत्ति के पूरे आंकड़े
पहली बार सामने आई कुल संपत्ति (Mahakal Ka Khazana)
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के पास वर्तमान में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), नकद राशि और स्थायी संपत्ति का एक विशाल भंडार है. समिति की वित्तीय सुदृढ़ता का अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है.
- करीब 472 करोड़ रुपए. यह राशि यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ इंडिया में जमा है.
- बैंक खातों में नकद राशि: विभिन्न बैंक खातों में लगभग 16 करोड़ रुपए जमा हैं.
भरपूर जमीन और गहने (Financial Breakdown of Baba Mahakal)
समिति के पास लगभग 90 एकड़ बेशकीमती जमीन है, जिसकी कीमत करोड़ों में है (हालांकि, कुछ जमीनों के मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं). मंदिर के पास पर्याप्त मात्रा में सोना और चांदी भी मौजूद है, जिसकी अनुमानित कीमत लगाना अभी बाकी है.
‘महाकाल लोक’ के बाद भक्तों में रिकॉर्ड वृद्धि (Mahakal Temple Net Worth)
11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री द्वारा ‘श्री महाकाल लोक’ के लोकार्पण ने मंदिर के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया. इसके बाद श्रद्धालुओं की संख्या में तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई है. इससे रिकॉर्ड वार्षिक आय भी बढ़ी है. 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक मंदिर को रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की आय हुई.
- प्रतिदिन श्रद्धालु: पहले जहां 40 से 50 हजार लोग आते थे, अब यह संख्या बढ़कर डेढ़ से दो लाख प्रतिदिन हो गई है.
- वार्षिक श्रद्धालु (2025): इस वर्ष लगभग 6 करोड़ श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए.
- श्रद्धालुओं की इस भारी आमद ने मंदिर की आय को भी नए शिखरों पर पहुंचा दिया है.
केवल दान से ही 78 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, जो पिछले छह वर्षों में सर्वाधिक है. यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 27 करोड़ रुपए अधिक है. इसके साथ ही लड्डू प्रसादी से भी भारी आय हुई है. लड्डू प्रसादी की बिक्री से समिति को 65 करोड़ रुपए की बड़ी आय हुई.
एक साल (2025) में मिला दिल खोलकर दान (Mahakal Temple total assets)
वर्ष 2025 के दौरान भक्तों ने बाबा महाकाल पर जमकर कृपा बरसाई. इस एक साल में प्राप्त दान का विवरण इस प्रकार है.
- कुल नकद दान: 107 करोड़ रुपए
- दान पेटियों से: 43 करोड़ रुपए
- शीघ्र दर्शन टिकट एवं रसीदों से: 64 करोड़ रुपए
- स्वर्ण दान: 1.48 किलो सोना (वर्ष 2024 की तुलना में मामूली कम)
- रजत दान: 592.36 किलो चांदी (वर्ष 2024 की तुलना में लगभग 193 किलो अधिक)
आय के विभिन्न स्रोत (विस्तृत विवरण)
- दान पेटियों से: 62 करोड़ रुपए
- शीघ्र दर्शन (नकद काउंटर): 5.50 करोड़ रुपए
- ऑनलाइन दान: 3.60 करोड़ रुपए
- अन्नक्षेत्र दान: 3.38 करोड़ रुपए
- गुप्त दान: 4.65 करोड़ रुपए
- मनी ऑर्डर: 1.23 लाख रुपए
वैभव के साथ बढ़ा खर्च
महाकाल लोक बनने के बाद मंदिर का विस्तार और जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं, जिसके कारण वार्षिक खर्च तेजी से बढ़कर लगभग 135 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. कर्मचारियों का वेतन, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, रखरखाव, निर्माण कार्य, अन्नक्षेत्र, गोशाला, महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पर्व-त्योहारों की व्यवस्थाएं.
- परिसर पहले 2.82 हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर 47 हेक्टेयर हो चुका है
- कर्मचारी को वर्तमान में बढ़कर 306 हो गए हैं.
- पहले मासिक खर्च करीब 2.5 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 11 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है.
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अटूट विश्वास और श्रद्धा का प्रमाण है खजाना (Mahakal Lok Donation Record)
बाबा महाकाल का यह विशाल खजाना अटूट विश्वास और श्रद्धा का प्रमाण है. ‘महाकाल लोक’ के निर्माण ने इस श्रद्धा को एक नया विस्तार और भव्यता दी है. मंदिर समिति के पास मौजूद 472 करोड़ की एफडी, 16 करोड़ नकद, 90 एकड़ जमीन और क्विंटल के हिसाब से सोना-चांदी, बाबा के प्रति लोगों के अपार प्रेम को दर्शाता है. यह खजाना गवाह है कि बाबा का वैभव अनादि काल से है और अनंत काल तक ऐसे ही बढ़ता रहेगा, भक्तों को अपनी शरण में लेता रहेगा.
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