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कानपुर के लड़के का कारनामा, बना डाली 5 लाख फर्जी ईमेल ID, पाकिस्तान-बांग्लादेश में बेचकर कमाए लाखों

Terror Emails Exposed: यूपी ATS ने कानपुर के अंकित शंखवार को फर्जी ईमेल आईडी बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया है. जांच में 5 लाख ईमेल खातों का डेटा, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजेक्शन और बम धमकी नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं. जानिए पूरी खबर.

A network of 5 lakh fake emails

5 लाख फर्जी ईमेल का जाल

Terror Emails Exposed: उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने कानपुर जिले के घाटमपुर इलाके से अंकित शंखवार नाम के युवक को गिरफ्तार किया है. जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह बड़ी संख्या में फर्जी ईमेल आईडी बनाकर पाकिस्तान और बांग्लादेश में मौजूद लोगों को बेचता था. अधिकारियों के मुताबिक, इन ईमेल अकाउंट्स का इस्तेमाल कई संवेदनशील जगहों और संस्थानों को बम धमकी वाले संदेश भेजने के लिए किया गया था.

स्कूलों और बड़े संस्थानों को भेजी गई थीं धमकियां

जांच में सामने आया है कि दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गुरुग्राम और मुंबई के कई स्कूलों समेत अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों को धमकी भरे ईमेल भेजे गए थे. एजेंसियों के अनुसार, पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ के दिल्ली-एनसीआर में आयोजित कॉन्सर्ट और बॉलीवुड के एक चर्चित अभिनेता के घर को उड़ाने की धमकी भी इसी नेटवर्क से जुड़े ईमेल्स के जरिए दी गई थी. इन्हीं मामलों की पड़ताल के दौरान जांच एजेंसियां फर्जी ईमेल बनाने और बेचने वाले नेटवर्क तक पहुंचीं और फिर आरोपों के आधार पर अंकित शंखवार को हिरासत में लिया गया.

लैपटॉप से मिला बड़ा डिजिटल डेटा

ATS की टीम ने आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया है. जांच के दौरान लैपटॉप में कई एक्सेल फाइलें मिलीं, जिनमें लगभग 5 लाख फर्जी ईमेल खातों का डेटा मौजूद बताया गया है. अधिकारियों के अनुसार, इन रिकॉर्ड्स में सिर्फ ईमेल आईडी ही नहीं बल्कि उनसे जुड़े पासवर्ड, रिकवरी ईमेल और अन्य सुरक्षा संबंधी जानकारियां भी दर्ज थीं. इससे जांच एजेंसियों को नेटवर्क के आकार का अंदाजा लगाने में मदद मिल रही है.

पहचान छिपाने के लिए अपनाता था खास तरीका

प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी अपनी ऑनलाइन गतिविधियों को छिपाने के लिए अलग-अलग वाई-फाई नेटवर्क और प्रॉक्सी सर्वरों का इस्तेमाल करता था. एजेंसियों का मानना है कि इसी तकनीक की मदद से वह बड़ी मात्रा में फर्जी डिजिटल पहचान तैयार करता था और उनका इस्तेमाल या बिक्री करता था.

क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होती थी पेमेंट

जांच के दौरान आर्थिक लेन-देन से जुड़ी एक अहम जानकारी भी सामने आई है. ATS के मुताबिक, फर्जी ईमेल अकाउंट खरीदने के बदले क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान किया जाता था. एजेंसियों का दावा है कि बांग्लादेश के अलामिन इस्लाम नामक व्यक्ति ने कुछ ईमेल अकाउंट खरीदने के लिए 6,000 यूएसडीटी का भुगतान किया था. अब जांचकर्ता इस लेन-देन और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रहे हैं.

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देश-विदेश तक फैले नेटवर्क की जांच जारी

फिलहाल ATS यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस कथित नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे. साथ ही, धमकी भरे ईमेल भेजने की पूरी साजिश में किसकी क्या भूमिका थी, इसकी भी जांच की जा रही है. जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस मामले के तार भारत के बाहर सक्रिय कुछ अन्य व्यक्तियों और समूहों से भी जुड़े हो सकते हैं. इसी वजह से डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और संपर्कों की गहराई से जांच की जा रही है.

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-भारत एक्सप्रेस



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