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‘घूसखोर पंडत’ के बाद अब दरोगा भर्ती में ‘अवसरवादी पंडित’, यूपी पुलिस परीक्षा में ऐसा क्या पूछ लिया कि योगी ने लगा दी क्लास?

यूपी दरोगा भर्ती परीक्षा के एक सवाल में ‘पंडित’ को ‘अवसरवादी’ के पर्याय के रूप में दिखाने पर विवाद खड़ा हो गया. मामला बढ़ने पर सीएम योगी ने कड़ा रुख अपनाते हुए पेपर सेटर्स पर कार्रवाई और ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए…

UP SI exam Pandit controversy: उत्तर प्रदेश में हाल ही में एक चर्चित वीडियो ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर मचे घमासान की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब दरोगा भर्ती परीक्षा के एक सवाल ने नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है. यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा आयोजित दारोगा भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द को ‘अवसरवादी’ के पर्याय के तौर पर पेश किए जाने के बाद विवादों का सैलाब आ गया है. इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इसे सीधे तौर पर जातिगत अपमान बताते हुए मोर्चा खोल दिया.

क्या था वो सवाल जिसने सुलगा दी चिंगारी?

दरअसल 14 और 15 मार्च को आयोजित दरोगा भर्ती परीक्षा के हिंदी सेक्शन में एक सवाल पूछा गया कि ‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाला’ वाक्यांश के लिए एक शब्द का चयन कीजिए. अभ्यर्थियों के होश तब उड़ गए जब उन्होंने विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द को देखा. अन्य विकल्प ‘अवसरवादी’, ‘निष्कपट’ और ‘सदाचारी’ थे. इस सवाल के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘घूसखोर पंडत’ वाले विवाद से जोड़कर देख रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि सरकारी तंत्र के भीतर एक खास मानसिकता के तहत किसी वर्ग विशेष को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है.

प्रियांक कानूनगो का कडा प्रहार

एनएचआरसी(NHRC) सदस्य प्रियांक कानूनगो ने इस प्रश्नपत्र की फोटो ‘एक्स’ पर साझा करते हुए इसे बेहद निंदनीय कृत्य बताया. उन्होंने साफ कहा कि किसी भी समूह को उसकी जातिगत पहचान के आधार पर अपमानित करना और उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाना मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन है. उन्होंने चेतावनी दी कि इस शिकायत पर आयोग गंभीरता से कार्यवाही कर रहा है. कानूनगो के इस कड़े रुख ने भर्ती बोर्ड की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं कि आखिर लाखों युवाओं का भविष्य तय करने वाले पेपर की जांच में ऐसी ‘जातिवादी’ चूक कैसे हो गई?

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सीएम योगी ने क्या लिया एक्शन?

विवाद बढ़ता देख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कड़ा रुख अपनाते हुए भर्ती बोर्ड के सभी चेयरपर्सन्स को तलब किया. मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति, जाति, पंथ या संप्रदाय की आस्था के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसे ‘हैबिचुअल ऑफेंडर्स’ (आदतन गलती करने वाले पेपर सेटर्स) को तुरंत प्रतिबंधित किया जाए. सीएम ने यह भी आदेश दिया कि भविष्य में पेपर सेट करने वाली संस्थाओं के साथ होने वाले करार (MOU) में इस मर्यादा का विशेष जिक्र किया जाए.

15 लाख युवाओं की परीक्षा पर विवादों का साया

बता दें कि इस परीक्षा में प्रदेशभर से करीब 15,75,760 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया है. 4543 पदों के लिए चल रही इस सीधी भर्ती में इस तरह के विवादित सवाल ने प्रशासनिक मशीनरी की बड़ी लापरवाही को उजागर किया है. परीक्षा केंद्रों पर पहले ही तनाव का माहौल था और अब इस ‘जातिगत टिप्पणी’ वाले सवाल ने इसे सियासी और सामाजिक रंग दे दिया है. अब देखना यह है कि क्या भर्ती बोर्ड इस सवाल को निरस्त करता है और जिम्मेदार पेपर सेटर्स के खिलाफ क्या दंडात्मक कार्रवाई होती है.

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-भारत एक्सप्रेस



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