दिल्ली के एक निजी मैनेजमेंट संस्थान में छात्राओं के यौन उत्पीड़न के आरोपी स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तारी आगरा के एक होटल से बीती रात करीब 3:30 बजे हुई, जहां वह कई दिनों से छिपा हुआ था. पुलिस को उसकी आखिरी लोकेशन आगरा में मिली थी, जिसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया.
चैतन्यानंद पर आरोप
चैतन्यानंद पर आरोप है कि वह छात्राओं को देर रात अपने क्वार्टर में बुलाने के लिए मजबूर करता था और न आने पर फेल करने की धमकी देता था. मार्च 2025 में एक ईडब्ल्यूएस कोटे की छात्रा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 60,000 रुपये का चंदा देने के बावजूद उससे और पैसे मांगे गए. जब उसने विरोध किया तो उसे या तो और पैसे देने, बिना वेतन काम करने या कॉलेज छोड़ने का विकल्प दिया गया.
बड़े स्तर पर फैला था नेटवर्क
प्रबंधन संस्थान के पूर्व अध्यक्ष चैतन्यानंद (62) ने संस्थान में अपने वफादारों का नेटवर्क बना रखा था और उन्हें ऐसे पदों पर नियुक्त किया था जिनके लिए वे योग्य नहीं थे. 4 अगस्त को एक वर्चुअल मीटिंग में 30 से ज़्यादा छात्राओं ने यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़ और धमकियों की बात बताई, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई.
कुछ महिलाएं भी टीम में थी
पुलिस को यह भी पता चला है कि चैतन्यानंद ने कुछ महिलाओं को अपनी टीम में रखा था जो छात्राओं की चैट डिलीट करवाती थीं. पुलिस के पास चैट डिलीट कराने के सबूत भी हैं. वह छात्राओं को लंदन घुमाने का लालच भी देता था और कहता था कि उन्हें पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे.
जमानत की याचिका खारिज
चैतन्यानंद ने दिल्ली की अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका लगाई थी जिसे शुक्रवार को खारिज कर दिया गया. अदालत ने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है. जांच में यह भी सामने आया कि उसने एक फर्जी ट्रस्ट बनाकर संस्थान की संपत्ति को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया और बिना अनुमति भूखंड को उप-पट्टे पर दे दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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