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काशी में पीएम मोदी ने देखा ‘काल का चक्र’! जानें क्या है वो ‘वैदिक घड़ी’ जिसने मचाया इंटरनेट पर तहलका?

Narendra Modi ने Kashi Vishwanath Temple में ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का अवलोकन किया और इसकी सराहना की. 30 घंटे के वैदिक समय चक्र पर आधारित यह घड़ी अब सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है और वैश्विक चर्चा में है…

Vedic Clock Kashi Vishwanath: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया काशी विश्वनाथ यात्रा ने केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैज्ञानिक संदेश भी दिया है. बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद पीएम मोदी ने मंदिर परिसर में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ का बारीकी से अवलोकन किया.

पीएम मोदी द्वारा इसे “प्राचीन ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का शानदार संगम” बताए जाने के बाद से यह घड़ी वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गई है. सोशल मीडिया से लेकर टीवी स्क्रीन तक, 78 लाख से अधिक लोग इस ‘समय चक्र’ के मुरीद हो चुके हैं.

जानें उस वैदिक घड़ी का रहस्य(Vedic Clock Kashi Vishwanath)

यह कोई आम घड़ी नहीं है जो 24 घंटे का समय दिखाए. उज्जैन के महाराजा विक्रमादित्य अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित यह घड़ी सूर्योदय पर आधारित 30 घंटे के चक्र का पालन करती है. इसमें समय को 30 मुहूर्तों में विभाजित किया गया है. यह घड़ी न केवल समय बताती है बल्कि तिथि, नक्षत्र, योग, करण और ग्रहों की सटीक स्थिति भी प्रदर्शित करती है, जिससे भारतीय पंचांग प्रणाली को समझना अब आम आदमी के लिए भी आसान हो गया है.

क्या है मध्यप्रदेश का एंगल?

इस वैदिक घड़ी के पीछे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की जुगलबंदी है. एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह घड़ी यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट की थी, जिसे 4 अप्रैल को मंदिर परिसर में स्थापित किया गया था.

लेकिन पीएम मोदी के अवलोकन और उनकी सराहना के बाद हैशटैग #VikramotsavVaranasi भारत के ट्रेंडिंग सेक्शन में टॉप पर पहुंच गया. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिली इस जबरदस्त प्रतिक्रिया ने भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को युवाओं के बीच ‘कूल’ बना दिया है.

‘वैदिक घड़ी’ का डिजिटल अवतार

इस पहल को केवल एक फिजिकल घड़ी तक सीमित नहीं रखा गया है. इसका अपना एक मोबाइल एप्लिकेशन भी है, जो गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है. यह ऐप 189 भाषाओं को सपोर्ट करता है और इसमें महाभारत काल से लेकर अब तक के 7,000 वर्षों के पंचांग की जानकारी मौजूद है. इसमें वैदिक अलार्म की भी सुविधा है, जो आपको शुभ-अशुभ समय के आधार पर सतर्क करता है. यह ऐप अब दुनिया भर के खगोल प्रेमियों के लिए एक बड़ा टूल बन गया है.

अगला पड़ाव अयोध्या और ज्योतिर्लिंग

वाराणसी में मिली भारी सफलता के बाद मध्य प्रदेश सरकार अब इस योजना को और विस्तार देने जा रही है. अधिकारियों के मुताबिक, अब देश के सभी प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और अयोध्या के राम मंदिर में भी ऐसी ही विक्रमादित्य वैदिक घड़ियां स्थापित की जाएंगी.

इसका उद्देश्य साफ है-भारत की पारंपरिक वैज्ञानिक विरासत को घर-घर पहुँचाना और आधुनिक पीढ़ी को यह बताना कि हमारे पूर्वजों के पास समय को नापने का दुनिया का सबसे सटीक और वैज्ञानिक तरीका था.

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-भारत एक्सप्रेस



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