World Economic Forum 2026: स्विट्जरलैंड के दावोस शहर में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की 56वीं सालाना बैठक का आगाज होने जा रहा है. रविवार, 18 जनवरी को भारत से कई बड़े नेता और उद्योगपति यहां पहुंचे. इनमें केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी, केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राम मोहन नायडूऔर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शामिल हैं. यह बैठक 19 से 23 जनवरी तक चलेगी और इसमें दुनिया भर से लगभग 3,000 प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है.
क्या है सम्मेलन का विषय?
इस बार सम्मेलन का विषय ‘ए स्प्रिट ऑफ डायलॉग’ रखा गया है. मौजूदा हालात में जब अमेरिकी टैरिफ और विभिन्न देशों के बीच संघर्ष से वैश्विक अस्थिरता बढ़ रही है, यह थीम खास मायने रखती है. इसका उद्देश्य है कि विभाजित दुनिया में सहयोग और साझेदारी को फिर से मजबूत किया जाए.
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल की बैठक में राजनीतिक भागीदारी का स्तर रिकॉर्ड रहेगा. करीब 400 से अधिक शीर्ष नेता इसमें हिस्सा लेंगे, जिनमें लगभग 65 राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख शामिल हैं. जी7 देशों के छह नेता भी इस मंच पर मौजूद रहेंगे. इसके अलावा 1,700 से ज्यादा सीईओ, 30 से अधिक विदेश मंत्री, 60 से ज्यादा वित्त मंत्री, कई केंद्रीय बैंक गवर्नर और ट्रेड मिनिस्टर भी दावोस में जुटेंगे.
दावोस में जुटेंगे दुनिया के दिग्गज
वैश्विक स्तर पर कई दिग्गज हस्तियां इस बैठक का हिस्सा बन रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन जैसे बड़े नाम इसमें शामिल होंगे. बिजनेस जगत से एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग, माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला, एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई, गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हसाबिस, पलान्टिर के सीईओ एलेक्स कार्प और ओपनएआई की सीएफओ सारा फ्रायर भी मौजूद रहेंगे.
भारतीय कॉरपोरेट जगत से दिग्गज
देश के 100 से ज्यादा शीर्ष उद्योगपति भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे. भारतीय कॉरपोरेट जगत से रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, टाटा ग्रुप के एन. चंद्रशेखरन, बजाज ग्रुप के संजीव बजाज, जुबिलेंट भारतिया ग्रुप के हरि एस. भरतिया और टीवीएस मोटर्स के सुदर्शन वेणु जैसे बड़े नाम दावोस में अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगे.
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दावोस की यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही है. ऐसे में भारत की सक्रिय भागीदारी न केवल उसकी वैश्विक भूमिका को मजबूत करेगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विकास की दिशा में भी अहम योगदान देगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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