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दिल्ली से जुड़े हाईवे पर ट्रैफिक संकट: संसद की कमेटी ने जताई गहरी चिंता, दिए सख्त सुझाव

दिल्ली से जुड़े हाईवे पर ट्रैफिक, अतिक्रमण और टोल वसूली को लेकर संसद की कमेटी ने चिंता जताई, तकनीकी समाधानों और सख्त कार्रवाई की सिफारिश की.

Traffic

ट्रैफिक की प्रतीकात्मक तस्वीर.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

देश की राजधानी दिल्ली को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण, और निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े गंभीर मुद्दों को लेकर संसद की स्थाई समिति ने एक अहम बैठक की. परिवहन, पर्यटन और संस्कृति मामलों से जुड़ी इस कमेटी की बैठक में खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से आने-जाने वाले मार्गों की स्थिति पर चर्चा की गई.

ट्रैफिक, टोल और खराब सड़कें बनीं चिंता का कारण

बैठक में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और वर्तमान स्थिति की विस्तृत जानकारी दी. वहीं, विपक्षी सांसदों ने अधूरे निर्माणाधीन हाईवे पर भी टोल वसूली जारी रहने को लेकर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि जब सड़कें पूरी नहीं हुई हैं, तो जनता से टोल लेना न केवल अनुचित है, बल्कि यह उनके साथ सीधा अन्याय भी है.

इसके अलावा कई सांसदों ने खराब सड़क गुणवत्ता और बार-बार मरम्मत की आवश्यकता पर भी चिंता जताई. उन्होंने बताया कि करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, फिर भी कई क्षेत्रों में सड़कों की हालत खराब बनी हुई है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में है.

अवैध कट और ढाबों से बढ़ रहे हादसे

बैठक में दिल्ली से लगे हाईवे पर अव्यवस्थित कट, अवैध पार्किंग और सड़क किनारे बने ढाबों की भी चर्चा हुई. कांग्रेस के एक सांसद ने कहा कि कई ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों ने हाईवे पर अवैध कट बना लिए हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है. उन्होंने मांग की कि इन अवैध कट्स को तुरंत बंद किया जाए और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई हो.

कालिंदी कुंज टोल प्लाजा को लेकर अहम सुझाव

कालिंदी कुंज स्थित MCD टोल प्लाजा को लेकर भी बैठक में गहन चर्चा हुई. सांसदों ने कहा कि इस टोल पॉइंट की वजह से पिक आवर में भारी जाम लगता है, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी होती है. उन्होंने सुझाव दिया कि टोल कलेक्शन के लिए अलग लेन बनाई जाए या टोल प्रणाली को और अधिक आधुनिक बनाया जाए, जिससे वाहनों की गति प्रभावित न हो.

तकनीकी समाधान और डेटा विश्लेषण पर ज़ोर

बैठक में ट्रैफिक की अनुमानित मात्रा, राजमार्गों की कुल लंबाई, अब तक हुए खर्च, और भविष्य के निर्माण कार्यों को लेकर डेटा आधारित योजना की आवश्यकता पर भी बल दिया गया. कमेटी ने सुझाव दिया कि आधुनिक तकनीकों जैसे ऑटोमैटिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, रीयल टाइम मॉनिटरिंग, और डेटा एनालिटिक्स की मदद से ट्रैफिक नियंत्रण और सड़क निर्माण की गुणवत्ता में सुधार संभव है.

पुलिस अधिकारियों को दिए तकनीकी सुझाव

बैठक में हरियाणा और उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया था. उन्हें ट्रैफिक नियंत्रण, निगरानी, और रोड सेफ्टी से जुड़े कई तकनीकी सुझाव दिए गए. कमेटी ने स्पष्ट किया कि दिल्ली से सटे हाईवे सिर्फ मार्ग नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी की जीवनरेखा हैं और इनके सुचारु संचालन के बिना देश की आर्थिक और प्रशासनिक गतिविधियां बाधित हो सकती हैं.

आगे की कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, परिवहन मंत्रालय सांसदों द्वारा उठाए गए सवालों और सुझावों का जवाब लिखित रूप में देगा. साथ ही कमेटी की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए सुधारात्मक कदम उठाने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जा सकती है. अब देखना होगा कि मंत्रालय इन सुझावों को किस हद तक लागू करता है और जमीनी स्तर पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है.



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