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मुफ्त राशन वितरण फर्जीवाड़े में यूपी CID की बड़ी कार्यवाई

उत्तर प्रदेश में पात्रों को राशन वितरण की शिकायत की कई खबरें सामने आई हैं,यहां तक कि उनके नाम पर फर्जी तरीके से राशन वितरण कर दिया गया और पात्रों को नहीं मिला , अब यूपी CID ने इस मामले में बड़ा खुलासा किया है

उत्तर प्रदेश में पात्रों को फ्री राशन वितरण में फर्जीवाड़े के काफी मामले सामने आए थे ,यहां तक कि उनके नाम पर फर्जी तरीके से राशन वितरण कर दिया गया और पात्रों को नहीं मिला. राशन वितरण करने में मनमानी की शिकायत भी सामने आई थीं. बड़ा सवाल यही था कि एक तरफ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री हर गरीब के थाली में खाना पहुचाना चाहते हैं तो वही बिचौलिए केंद्र और राज्य सरकार की इस योजना में आखिर सेंध कैसे लगा रहे हैं? खैर जब नियत साफ़ हो तो मजबूत सरकार के रहते कोई भी अपराधी बच नहीं पाता है. प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन सभी खाद्यान्न घोटाले मामलों की जांच यूपी CID को सौंप दी, खाद्दान घोटाले से सम्बंधित शिकायतों की गहनता से जांच करने के बाद अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने खाद्दान घोटाले में बड़ा ख़ुलासा किया है.

अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के पुलिस महािनदेशक दिपेश जनुेजा ने बताया कि “खाद्यान्न विभाग के जनपद स्तरीय अधिकारियों / कर्मचारियों द्वारा राशन विक्रेताओं से मिलीभगत कर वास्तविक लाभार्थियों के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति के आधार को Edit कर सीड कर दिया गया और फिर अन्य व्यक्ति को राशन प्रदान किया गया है.” इस रिपोर्ट के सामने आते ही खाद्दान घोटालेबाजों का सफाया अब तय हो गया है.

आधार में फर्जीवाड़ा कर हुआ घोटाला

CID के पुलिस महािनदेशक दिपेश जनुेजा ने बताया कि “आधार Authentication सुविधा का दुरुपयोग करने वालों के विरुद्ध CID द्वारा कार्यवाही शुरू की गई. जिसमें पाया गया कि E-POS मशीनों से राशनकार्ड लाभार्थियों को किये जाने वाले आधार आधारित आवश्यक वस्तु वितरण हेतु NIC उत्तर प्रदेश के माध्यम से UIDAI की Biometric Authentication की तकनीक का प्रयोग किया जाता है. खाद्यान्न विभाग के जनपद स्तरीय अधिकारियों / कर्मचारियों द्वारा राशन विक्रेताओं से मिलीभगत कर वास्तविक लाभार्थियों के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति के आधार को Edit कर सीड कर दिया गया और फिर अन्य व्यक्ति को राशन प्रदान किया गया। ऐसे लाभार्थियों में अनेकों लोग किशोर पाये गये हैं. तत्पश्चात् जब रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को प्रेषित करने से पूर्व उसमें वास्तविक लाभार्थी का आधार पुनः ठीक कर दिया गया, जिससे वास्तविक लाभार्थियों यानि BPL परिवारों को शासकीय सुविधा नहीं मिल पायी. यह सब सुनियोजित तरीके से योजना बनाकर बहुत वृहद स्तर पर किया गया.”

एक आधार से 100 घोटाले

दिपेश जनुेजा ने बताया कि “NIC लखनऊ द्वारा विभिन्न अभियोगों में दुरुपयोग से सम्बन्धित सूची उपलब्ध कराने पर ज्ञात हुआ कि एक-एक आधार कार्ड पर 90 से 100 तक राशन वितरण किया गया था. उदाहरण स्वरूप अ0सं0 890/2018 u/s 420 भा0द0वि व धारा 3/7 आवश्यक वस्तु अधिनियम, सिविल लाइन मुरादाबाद में अपराध संख्या–xxxxxx1356 में 88 राशन कार्डों का दुरुपयोग; xxxxxx1267 में 65 राशन कार्डों का दुरुपयोग; xxxxxx7247 में 56 राशन कार्डों का दुरुपयोग; xxxxxx6696 में 61 राशन काडौँ का दुरुपयोग एवं xxxxxx2510 में 27 राशन कार्डों का दुरुपयोग पाया गया.”

तय होगी DSO एवं ADM की जिम्मेदारी

दिपेश जुनेजा ने बताया कि “CID द्वारा गहनता से विवेचना करने पर अन्य अभियुक्तों को भी प्रकाश में लाया गया एवं गरीब लाभार्थियों को राहत दिलाने का भरपूर प्रयास किया गया. जिला पूर्ति निरीक्षकों की जिम्मेदारी तय की गई एवं उनके विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कराने की शासन से संस्तुति की गयी. कुछ जांचों में DSO एवं ADM स्तर के अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय किये जाने की संस्तुति की गयी है. प्रदेश में खाद्यान्न घोटालों से सम्बन्धित लम्बित प्रकरणों को चिन्हित करते हुए विशेष अभियान चलाकर यथाशीघ्र विवेचना पूर्ण कर निस्तारण कराया जा रहा है.”

  • खाद्दान घोटाले से सम्बंधित 134 प्रकरण में से 110 का निस्तारण कर दिया गया है, जबकि 24 शेष बचे हैं. इनमे से मेरठ सेक्टर के 94 में से 76, बरेली सेक्टर के 26 में से 25, आगरा सेक्टर के 14 में से 9 प्रकरण का निस्तारण कर दिया गया है.

जिला पूर्ति अधिकारी से लेकर कंप्यूटर ऑपरेटर तक की मिली भगत

CID के पुलिस महािनदेशक दिपेश जनुेजा ने बताया कि “इसी प्रकार एक अन्य प्रकरण मु0अ0सं0 362/2018 में अभियुक्तगण तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक आशाराम, पूर्ति निरीक्षक अजय कुमार, राशन डीलर मैसर्स नवीन कुमार, उप०सह०स० नक्कार चियान के सेल्समैन अमित कुमार तथा कम्प्यूटर ऑपरेटर शहनवाज द्वारा आपराधिक षडयंत्र के जरिये आधार कार्ड सत्यापन का छलपूर्वक दुरुपयोग करते हुए एक आधार कार्ड को अनेकों बार प्रयोग कर खाद्यान्न का मिथ्या वितरण दिखाया गया था. जिससे अभियुक्तगण द्वारा वास्तविक राशन कार्ड धारक उपभोक्ताओं को हानि पहुँचायी गयी थी तथा स्वयं के लिए विधि विरूद्ध लाभ अर्जित किया गया.

अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने की कड़ी कार्यवाई

अपराध अनुसंधान विभाग के खण्ड मेरठ की कुशल विवेचना एवं मौखिक / अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर सम्बन्धित अभियुक्तगण के विरूद्ध धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120B भा0द0वि, धारा 66C I.T. ACT, धारा 39 आधार अधिनियम एवं धारा 3/7 आवश्यक वस्तु अधिनियम के अन्तर्गत आरोप-पत्र मा० न्यायालय में प्रेषित किया गया एवं जनपद मेरठ के तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी, विकास गौतम द्वारा अपने कर्तव्यों / दायित्वों का निर्वहन न किये जाने के कारण, उनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही किये जाने की संस्तुति की गयी.”

-भारत एक्सप्रेस



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