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अलका लांबा को झटका: पुलिस से धक्का-मुक्की और रास्ता जाम करने के मामले में कोर्ट ने ठहराया दोषी,5 जून को सजा पर बहस

Jantar Mantar Protest 2024: महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा को राऊज एवेन्यु कोर्ट ने 2024 में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस से धक्का-मुक्की और रास्ता जाम करने का दोषी पाया है. कोर्ट इस मामले में 5 जून को सजा पर बहस करेगा. इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट भी उनकी पुनर्विचार याचिका खारिज कर चुका है.

Rouse Avenue Court

Rouse Avenue Court

Edited by Shubhra Rai

Jantar Mantar Protest 2024: राऊज एवेन्यु कोर्ट से महिला कांग्रेस के अध्यक्ष अलका लांबा को झटका लगा है. कोर्ट ने महिला आरक्षण की मांग को लेकर जंतर मंतर पर 2024 में हुए प्रदर्शन के मामले में दोषी करार दिया है. 5 जून को सजा पर बहस होगी. कोर्ट अलका लांबा को बीएनएस की प्रावधानों के तहत अधिकारियों को बाधा पहुचाने और सार्वजनिक सड़क अवरुद्ध करने का दोषी ठहराया है.

पहले भी दिल्ली हाई कोर्ट से झटका

इससे पहले अलका लांबा को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा था. कोर्ट ने उनके ओर से दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया था. अलका लांबा ने जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की, आदेश की अवहेलना और सार्वजनिक मार्ग को बाधित करने के मामले में बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत तय किए गए आरोप को चुनौती दी थी.

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि वीडियो में अलका लांबा को बैरिकेड्स कूदते, पुलिसकर्मियों को धक्का देते और प्रदर्शनकारियों को भी बैरिकेड्स पार करने के लिए संकेत करते हुए देखा जा सकता है.

पुलिस पर हमले का आरोप

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले संसद में महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर हमले का आरोप है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इस कोर्ट की सोची-समझी राय है कि पहली नजर में आरोपी अलका लांबा के खिलाफ बीएनएस की धारा 132/221/223 (a)/ 285 के तहत मामला बनता है. इसलिए ऊपर बताए गए प्रोविजन के तहत आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया जाता है.

प्रथम दृष्टया संदेह पैदा करती

साथ ही कोर्ट ने उनके द्वारा मामले से बरी किए जाने की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया था. अदालत ने पुलिस के वीडियो साक्ष्यों, शिकायतकर्ता और अन्य पुलिसकर्मियों के बयानों का संज्ञान लेते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रथम दृष्टया संदेह पैदा करती है. हालांकि मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से पेश वकील ने दलील देते हुए कहा था कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और तय क्षेत्र में ही हुआ.

कोई स्वतंत्र गवाह या चोट के सबूत नहीं हैं. वीडियो में भी हमला या सड़क जाम नहीं दिखता. लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को मानने से इनकार करते हुए आरोप तय कर दिए थे.

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-भारत एक्सप्रेस 



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