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सावधान! कबूतरों को दाना खिलाने पर अब लगेगा जुर्माना, बांद्रा कोर्ट ने व्यवसायी को माना दोषी

देश में पहली बार सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना डालने पर सजा सुनाई गई है. बांद्रा की अदालत ने एक व्यवसायी पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया है.

सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना डालने पर रोक लगाने की मांग लगातार उठती रहती है. इसी बीच कबूतर को दाना डालने पर देश में किसी को पहली बार सजा हुई है. बांद्रा की एक निचली अदालत ने कबूतरों को दाना डालने पर एक व्यवसायी को दोषी ठहराते हुए उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यह कृत्य जीवन के लिए खतरनाक बीमारियों के संक्रमण के फैलने की आशंका पैदा करता है.

जुलाई में बॉम्बे हाई कोर्ट ने खुले में कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध लगाया था, उसके बावजूद नितिन सेठ ने दाना डालने की गलती की थी. हालांकि नितिन सेठ ने अपनी गलती को स्वीकार करते हुए सजा में ढील देने की मांग की. लेकिन कोर्ट ने इनकार कर दिया. दादर इलाके में कबूतरखाना बंद होने के बाद कबूतरों को दाना खिलाया. यह सजा भारतीय दंड संहिता की धारा 223 (ख) के तहत सुनाई गई. यह स्पष्ट था कि व्यापारी ने जनता के स्वास्थ्य, जीवन और सुरक्षा को खतरे में डाला था. इसके अलावा उसपर बीएनएस की धारा 271 के तहत स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बीमारी फैलाने का भी आरोप लगाया गया था.

वही दिल्ली में भी बॉम्बे के तर्ज पर सार्वजनिक जगह पर कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध है. इसी साल मार्च में यह नियम लागू किया गया था. दिल्ली नगर निगम ने कश्मीरी गेट के पास तिब्बती मार्केट, ईदगाह गोलचक्कर और पंचकुइयां रोड़ पर अंबेडकर भवन के पास कबूतरों को दाना डालने पर रोक लगा दी है. एमसीडी का कहना है कि गंदगी रोकने के लिए यह नियम लाया गया है.

दिल्ली में 25 लाख से अधिक कबूतर

एमसीडी के मुताबिक आवारा जानवरों को खाना खिलाने और पक्षियों को दाना डालने पर 200 से 500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है. ऐसा करने वालों को एमसीडी घर पर चालान भेज रही हैं. जबकि एनजीटी में दायर याचिका में कहा गया है कि याचिका में दावा किया गया है कि एक साल में एक कबूतर 12 से 15 किलों बीट करता है और दिल्ली में 25 लाख से अधिक कबूतर हैं. याचिका में यह भी दवा किया गया है कि वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार कबूतरों की बीट में खतरनाक बैक्टीरिया होते है. जिनसे फूड प्वाइजनिंग होने का खतरा रहता है. कबूतरों को दाना डालने के पीछे कई स्वास्थ्य संबंधी खतरों के फैलने की संभावना जताई जाती है. इसकी वजह है कबूतरों की बीट और पंख, जहां भी कबूतरों को दाना डाला जाता है, वहां वे बीट करते है और उनके पंख गिरते हैं, इनसे कई बीमारियां पनपने का खतरा होता है. इसे लेकर कई स्टडीज भी हुई हैं. जिसमें खुलासा हुआ है कि कबूतर की बीट में मौजूद बैक्टीरिया फेफड़े या सांस संबंधी बीमारियां फैला सकता है.

इसके अलावा उनके मल और पंखों से निकलने वाले फंगस, बैक्टीरिया क्रिप्टोकोकस, हिस्टोप्लास्मोसिस, साल्मोनेला और ई-कोलाई से फेफडो की सृजन यानी हाईपरसेंसिटीवीटी न्यूमोनाइटिस, निमोनिया, क्रिप्टोकोकोसिस, हिस्टोप्लास्मोसिस और सिटाकोसिस जैसी गंभीर बीमारियां होने की संभावना होती है. ई कोलाई से लिवर और पेट संबंधी रोग होने का खतरा होता है. यही कारण है कि कबूतरों को दाना डालने पर प्रतिबंध लगाया गया है. उत्तराखंड हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस लोकपाल सिंह ने हाई कोर्ट के फैसले को स्वागत योग्य बताया. उनके मुताबिक कबूतरों को दाना खिलाना आज के समय में सबसे बड़ा अपराध है.

लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर

उन्होंने कहा कि सजा बॉम्बे में हुई है और आज दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे तो देखेंगे कि बोरियों भरकर कबूतर का दाना खिलाते है. देश के अंदर ऐसा कानून बनना चाहिए कि रेजिडेंशियल एरिये के अंदर सार्वजनिक स्थान को छोड़कर अपने छतों पर या कही भी कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक लगनी चाहिए. कबूतर एक पक्षी है और हमेशा से ही जंगल में अपना खाना पानी की तलाश करता रहा है. चाहे कबूतर हो या बंदर इनको हमने खाना पानी देकर बुला लिया. गलती उनकी नही गलती हमारी है. इसको लेकर कानून बनना चाहिए और ये सब रुकना चाहिए.

वही सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रमोद चौधरी ने हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. उनकी माने तो देश में इसको लेकर अभी तक कोई कानून नही है. कानून बनना चाहिए. क्योंकि कबूतर के बीट से सांसों की गंभीर बीमारी होती है. साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर इसका असर देखने को मिलता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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