दिल्ली बार एसोसिएशन ने हाई कोर्ट के पहले और तीसरे शनिवार को नियमित कार्य दिवस का विरोध किया है. इसको लेकर 27 मार्च को बैठक हुई थी, जिसमें बहिष्कार करने का फैसला लिया गया. 4 अप्रैल को इसकी शुरुआत होगी. बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति ने इसको लेकर नोटिस जारी किया है, और सदस्यों से अपील की है कि वे पहले और तीसरे शनिवार को अदालत में काम न करें. प्रत्येक अदालत के लिए प्रॉक्सी वकील नियुक्त किए जाएंगे ताकि जरूरी मामलों की सुनवाई बाधित न हो.
क्या है वकीलों की शिकायत?
बार एसोसिएशन का कहना है कि हाई कोर्ट से कई बार इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया, लेकिन कोई बदलाव नहीं किया गया. जिसके बाद यह कदम उठाया गया है. बार का कहना है कि कार्यकारिणी को वकीलों की ओर से ये शिकायतें मिल रही थीं कि शनिवार को कोर्ट के चलते रहने से कई व्यावहारिक परेशानियां उत्पन्न हो रही हैं. इससे वकीलों का प्रोफेशनल शेड्यूल बिगड़ रहा है. शनिवार की सुनवाई से बाहर से आने वाले मुवक्किल से बातचीत, दिल्ली के बाहर की अदालतों में लगे मुकदमे, आगे की तैयारियां बाधित होती हैं.
हाई कोर्ट की पुरानी परंपरा में बदलाव
15 जनवरी 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने अधिसूचना जारी कर कहा था कि अब हर महीने के पहले शनिवार और तीसरे सप्ताह के शनिवार को भी कोर्ट बैठेगी. कोर्ट ने यह जानकारी अपनी वेबसाइट पर दी थी. दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि माननीय फुल कोर्ट ने 22 दिसंबर 2025 को हुई अपनी बैठक में यह तय किया कि हर महीने का पहला और तीसरा शनिवार कोर्ट के काम करने का दिन होगा.
पिछले साल यह तय किया गया था कि दिल्ली हाई कोर्ट की हर बेंच 2025 में हर महीने एक वर्किंग शनिवार रखेगी. कोर्ट ने अपनी पुरानी परंपरा में बदलाव करते हुए यह फैसला लिया है. पुरानी परंपरा के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर शनिवार को आमतौर पर छुट्टी रहती थी.
दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित मुकदमों के आंकड़े
दिल्ली हाई कोर्ट में ताजा आंकड़ों के अनुसार लंबित मुकदमों की संख्या 1.20 लाख के आसपास है. इसमें सबसे ज्यादा मामले रिट याचिका, टैक्स और आपराधिक मामले शामिल हैं. व्यक्तिगत तौर पर दाखिल मुकदमों की संख्या 34700 के आसपास रिट याचिका लंबित हैं, वहीं 34400 से अधिक आपराधिक मामलों से जुड़ी याचिका लंबित हैं. जबकि टैक्स से संबंधित 30 हजार से अधिक मामले लंबित हैं.
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