दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. यह याचिका एनएसयूआई उम्मीदवार विजय शंकर मीणा ने दायर की थी. कोर्ट ने मीणा को छूट दे दिया है कि वह इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय कमेटी के सामने अपनी शिकायत दर्ज करा सकते है.
मीणा ने चुनाव में कॉलेज प्रोफेसरों, प्रशासनिक अधिकारियों और चुनाव अधिकारियों पर पक्षपात और अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए चुनाव परिणाम को रद्द करने की मांग की थी. याचिका में कुछ तस्वीरें और वीडियो पेश किए गए थे, जिनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ प्रोफेसरों और चुनाव अधिकारियों को एबीवीपी उम्मीदवारों की जीत के बाद उनके साथ तस्वीरें लेते और जश्न मनाते हुए दिखाया गया था.
मीणा ने इन घटनाओं को चुनाव प्रक्रिया में संभावित पक्षपात का आधार बताया है. जस्टिस सौरभ बनर्जी ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि ये तस्वीरें यह साबित करने के लिए काफी नहीं थीं कि उनमें दिखने वाला कोई भी व्यक्ति डीयू का हिस्सा था और चुनाव के दौरान किसी उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहा था.
मीणा के वकील ने चुनाव प्रक्रिया में पक्षपात की आशंका जताते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति चुनाव के बाद खुले तौर पर किसी उम्मीदवार के समर्थन में नारे लगाता है, तो यह मानना मुश्किल है कि उसने चुनाव से पहले छात्रों के बीच ऐसा नही किया होगा. हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकीलों की दलीलों को खारिज कर दिया है.
लिंगदोह कमेटी की सिफारिशें इस मामले में लागू नहीं- कोर्ट
जस्टिस बनर्जी ने छात्र संघ चुनावों से जुड़े लिंगदोह कमेटी की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया. कोर्ट ने कहा कि इस मामले के तथ्यों पर लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को लागू नही किया जा सकता, क्योंकि याचिकाकर्ता यह स्पष्ट करने में असमर्थ रहा कि कथित घटनाएं किस तारीख और किस समय हुई थी. सुनवाई के दौरान डीयू की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता ने चार दिन पहले ही एक अर्जी दिया और यूनिवर्सिटी उस पर जल्द से जल्द फैसला करेगी.
कोर्ट ने विश्विद्यालय की ओर से पेश वकील की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए याचिका का निपटारा कर दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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