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दिल्ली हाईकोर्ट ने युवा वकील की तैयारी और सीनियर के रवैये की सराहना की, कहा- यह हमें उम्मीद देता है

दिल्ली हाई कोर्ट ने युवा वकील आयुष गुप्ता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने सीनियर की गैर-मौजूदगी में मामले की स्वतंत्र रूप से पैरवी की और केस की फाइल व रिकॉर्ड से पूरी तरह परिचित थे.

Delhi High Court

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान युवा वकील आयुष गुप्ता की सराहना की है. कोर्ट ने कहा कि गुप्ता ने अपने सीनियर वकील की गैर-मौजूदगी में न केवल मामले की स्वतंत्र रूप से पैरवी की, बल्कि वह केस की फाइल और रिकॉर्ड से पूरी तरह परिचित थे.

कोर्ट ने वरिष्ठ वकील आनंद वर्मा के उस रवैये की भी प्रशंसा की, जिन्होंने कार्यवाही के बीच अदालत पहुचने के बाद खुद बहस अपने हाथ में लेने के बजाए अपने जूनियर को ही दलीले जारी रखने दी. जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस निवेदिता अनिल शर्मा की डिवीजन बेंच ने एम्स बनाम गिरधारी लाल जाखड़ मामले की सुनवाई के दौरान की. कोर्ट ने एम्स की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए निर्देश दिया कि वह 8 सप्ताह के भीतर गिरधारी लाल जाखड़ की उम्मीदवारी पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें.

कोर्ट ने कहा कि वह रोजाना ऐसे मामले देखती है, जहां युवा वकील अपने सीनियर की ओर से पासओवर या स्थगन मांगते हैं. कई बार जब उनसे मामले पर दलील रखने को कहा जाता है तो वे केस की जानकारी नहीं होने या निर्देश नही मिलने की बात कहते हैं. कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में स्थितिइससे बिल्कुल अगल थी और यह एक स्वागत योग्य बदलाव है.

सीनियर वकील जूनियर को बहस रखने का अवसर दें- हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने कहा कि जूनियर अधिवक्ताओं को अपने मामलों की पूरी तैयारी रखनी चाहिए. साथ ही सीनियर वकीलों को भी जूनियर को अदालत के सामने अपनी बात रखने से हतोत्साहित नहीं करना चाहिए. कोर्ट ने एम्स की ओर से पेश आयुष गुप्ता और आनंद वर्मा दोनों की सराहना कार्टर हुए कहा कि ऐसे मामलों से अदालत को उम्मीद मिलती है.

बता दें कि एम्स ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के फैसले के खिलाफ अपील दायर किया था. कैट ने ड्राइवर पद के उम्मीदवार गिरधारी लाल जाखड़ को हक़ में फैसला दिया था. जाखड़ ने ड्राइवर पद की लिखित परीक्षा में 200 में से 161 अंक हासिल कर पांचवी रैंक को हासिल किया था. उन्होंने अन्य पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत आवेदन किया था.

हालांकि एम्स ने उनकी उम्मीदवारी इस आधार पर खारिज कर दिया कि उनका ओबीसी-एनसीएल प्रमाणपत्र निर्धारित अवधि यानी अप्रैल 2020 से मार्च 2021 के दौरान जारी हुआ था. हाई कोर्ट ने माना कि प्रमाणपत्र संबंधित वित्तीय वर्ष के लिए जाखड़ की ओबीसी -एनसीएल स्थिति को प्रमाणित करता था.

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-भारत एक्सप्रेस



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