बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी) के चुनावों में 10 साल से कम अनुभव वाले वकीलों ने लिए छह सीटें आरक्षित करने की मांग को लेकर दायर याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने अपने फैसले में स्प्ष्ट किया गया पूरी चुनाव प्रक्रिया और झगड़ों को सुलझाने की जिम्मेदारी उच्च शक्ति प्राप्त समितियों की है. लिहाजा हाई कोर्ट इसमें दखल नही देगा.
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि बार काउंसिल ऑफ दिल्ली चुनाव से जुड़ी कोई भी शिकायत सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में बनी समितियों के सामने उठाई जानी चाहिए. यह याचिका रमेश चंद्र सिंह ने दायर की थी. अदालत ने यह भी कहा कि एम वर्धन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को देखते हुए झगड़े सुलझाने सहित पूरी चुनाव प्रक्रिया की देखरेख उच्च शक्ति प्राप्त चुनाव समितियां करती हैं.
अनारक्षित सीटों पर सीनियर वकील भी लड़ सकते हैं चुनाव
दिल्ली बार काउंसिल के चुनाव में 10 साल से अधिक अनुभव वाले वकीलों के लिए 50 फीसदी सीट आरक्षित होती है. मतलब इन सीटों पर जूनियर वकील नहीं लड़ सकते. 30 फीसदी सीट महिला वकीलों के लिए आरक्षित कर दी गई हैं बची हुई 20 फीसदी सीट अनारक्षित छोड़ दी गई है, इसका मतलब है कि इन सीटों पर सीनियर वकील भी चुनाव लड़ सकते हैं.
अदालत ने एकल पीठ के.इस फैसले से सहमति जताई कि अपीलकर्ता के पास 10 साल से कम अनुभव वाले वकीलों के लिए बाकी सीटों में आरक्षण मांगने का कोई निहित अधिकार नहीं था.
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-भारत एक्सप्रेस
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