Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस ने कहा- ‘प्रताड़ना का आरोप गलत’

दिल्ली हाई कोर्ट में छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने के मामले पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रताड़ना के आरोपों को सिरे से खारिज किया है.

Delhi Police

छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट में दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने प्रताड़ना के आरोप को गलत करार दिया है. दिल्ली पुलिस ने कहा कि छात्रों द्वारा हिरासत और अवैध रूप से रोके जाने के आरोप पूरी तरह से मनगढंत और प्रेरित है. जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की बेंच दायर याचिका पर सुनवाई कर रही हैं. पुलिस ने कहा कि इन आरोपों का मुख्य उद्देश्य माओवादी गतिविधियों से जुड़ी एक संवेदनशील जांच में बांधा पहुचाना है.

पुलिस ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि यह पूछताछ एक लापता महिला और कथित माओवादी या नक्सली विचारधारा से जुड़े मामले का एक हिस्सा है. दिल्ली पुलिस ने यह हलफनामा गिरफ्तार छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से दायर याचिका पर दायर किया है. पुलिस द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामे में कहा है कि प्रदर्शनकारियों को केवल जुलाई 2025 में दर्ज एक एफआईआर के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा था कि किन परिस्थितियों में और किस कानून के तहत इन लोगों को हिरासत में लिया गया है.

लापता छात्रा को लेकर हाई कोर्ट में बढ़ी चिंता

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया था कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया था, अब उन्हें छोड़ दिया गया है. दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने 10 लोगों को हिरासत में लिया था. याचिकाओं में से एक सागरिका राजोरा ने यह याचिका दायर की है, जिसमें अदालत से उनकी बहन लक्षिता राजोरा को तुरंत अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश देने की मांग की गई है. 22 वर्षीय लक्षिता 13 मार्च की शाम से लापता हैं. याचिका में कहा गया है कि वो विजय नगर इलाके में एक छात्र संगठन के दफ्तर गई. 13 मार्च के शाम 8 बजे के बाद से लक्षिता राजोरा का मोबाइल फोन बंद है.

लक्षिता राजोरा की बहन ने जताई अवैध हिरासत की आशंका

दायर याचिका में कहा गया है कि लक्षिता राजोरा छात्र संगठन के जिस दफ्तर में गई थी, उस दफ्तर में मौजूद कई लोगों का शाम 8 बजे से कोई अता पता नहीं है. राजोरा ने एक “गंभीर और ठोस आशंका” जताई कि उनकी बहन को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अधिकारियों ने गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया हो सकता है. उन्होंने कहा कि लगभग आठ महीने पहले हिरासत में ली गई महिला और उसके साथियों को कथित तौर पर उसी एजेंसी द्वारा एक सप्ताह से अधिक समय तक बिना किसी औपचारिक गिरफ्तारी या मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए, अवैध हिरासत और कस्टडी में यातना का शिकार बनाया गया.

ये भी पढ़ें: Delhi Race Club: दिल्ली रेस क्लब और पोलो ग्राउंड को खाली कराने पर हाई कोर्ट की रोक; केंद्र सरकार को लगाई फटकार

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital